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प्रतिबंधित पॉलिथिन : 1.88 लाख रुपये वसूले, लेकिन नहीं सुधरे हालात

Sat, 07 Feb 2026 12:11 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
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बदायूं। प्रतिबंध के बाद भी शहर से लेकर देहात तक पॉलिथिन खुलेआम बिक रही है। इससे शहर के नाले चोक हैं। वहीं, हर माह कई गोवंश इन्हें खाने के चलते जान गवां रहे हैं। सब्जी से लेकर फल और किराने की दुकानों पर शुक्रवार को की गई पड़ताल के दौरान नियमों की धज्जियां उड़ती दिखीं। पालिका ने वर्ष 2025 में अक्तूबर में चलाए अभियान के दौरान 1.88 लाख रुपये की वसूली की थी, इसके बाद भी शहर के हालात सुधर नहीं सके हैं। एक साल से कोई अभियान न चलना भी खुलेआम पॉलिथिन बिकने का कारण माना जा रहा है।
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पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए घातक पॉलीथिन पर पूर्ण प्रतिबंध के बावजूद इसका खुलेआम इस्तेमाल किया जा रहा है। शहर के छोटे-बड़े बाजारों से लेकर गली-मोहल्लों की दुकानों तक, हर जगह पॉलीथिन में सामान बेचा और खरीदा जा रहा है। सब्जी, फल, मिठाई और किराने की दुकानों पर बिना किसी झिझक के पॉलीथिन में सामान थमाया जा रहा है। न दुकानदार परहेज कर रहे हैं और न ही ग्राहक इसका विरोध करते नजर आ रहे हैं।
जिले को पॉलीथिन मुक्त बनाने के उद्देश्य से कई बार अभियान चलाया गया। उस समय प्रशासन और नगर पालिका की ओर से जागरूकता कार्यक्रम चलाए गए। दुकानदारों को कपड़े और कागज के थैले इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित किया गया था। साथ ही कार्रवाई भी की गई। इस दौरान 1.88 लाख रुपये की जुर्माना भी दुकानदारों से वसूला गया।
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ऐसे में कुछ समय तक इसका असर भी दिखा, लेकिन धीरे-धीरे यह अभियान सुस्त पड़ गया। आज स्थिति यह है कि शहर में पॉलीथिन का प्रयोग पहले की तरह ही बेरोकटोक जारी है। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि पॉलीथिन न केवल नालियों और जलनिकासी व्यवस्था को जाम कर रही है, बल्कि मिट्टी और जल को भी प्रदूषित कर रही है। पशु इसे खाकर बीमार पड़ रहे हैं, वहीं लंबे समय तक इसका उपयोग मानव स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा बन सकता है।
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जागरूकता का नहीं दिख रहा असर
जिले में दुकानों और ठेले-खोमचे वालों के आसपास सिंगल यूज प्लास्टिक (एसयूपी) उपयोग-बिक्री की स्थिति देखी। इस दौरान बाजार में कपड़े, कागज का थैला लेकर बहुत कम लोग ही खरीदारी करते दिखे। अधिकतर लोग पॉलिथीन का इस्तेमाल करते दिख रहे हैं। बाजार में बड़े दुकानदार तो खरीदारों को कपड़े व कागज का बैग दे रहे हैं, लेकिन छोटे दुकानदार नियमों का उल्लंघन करते दिखे।



75 माइक्रोन प्लास्टिक है पूरी तरह से प्रतिबंधित
75 माइक्रोन तक के प्लास्टिक पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है। इसमें 19 ऐसी वस्तु में कान साफ करने के लिए प्लास्टिक की स्टिक वाले ईयर बड्स, गुब्बारों पर प्लास्टिक की स्टिक, प्लास्टिक के झंडे, प्लास्टिक के गिलास, प्लेट, चम्मच, कटोरी, चाकू, थर्माकोल की प्लेट, गिलास कटोरी, आमंत्रण पत्र, सिगरेट के पैकेट, मिठाई के डिब्बों को पैक करने वाली प्लास्टिक फिल्म, टॉफी में उपयोग होने वाली प्लास्टिक स्टिक आदि प्रतिबंधित है।

छुट्टा जानवरों के लिए भारी पड़ रही पॉलिथीन
शहर में सड़कों के किनारे घरों का कचरा भर फेंक दिया जाता है। इनके अंदर रखी सब्जियों और फलों के छिलके पॉलिथीन समेत गायें और अन्य जानवर खा जाते हैं। यह इनके पेट में जाकर फंस जाती है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. समदर्शी सरोज ने बताया कि ऐसे जानवरों का एक मात्र इलाज ऑपरेशन होता है। इससे जानवर बच गए तो यह किस्मत की बात होती है। पशुपालन विभाग के अधिकारियों की मानें तो ऐसे मामले कम होते हैं, जिनमें जानवर को बचा पाना संभव होता है। पॉलिथीन में कई तरह के विषैले पदार्थ मिले होते हैं, जिन्हें जानवर पचा नहीं पाता। इसके कारण इनके लिए प्राणघातक साबित होता है।

वर्जन
प्रतिबंधित पॉलिथीन बेचने वालों के खिलाफ बीच-बीच में अभियान चलाया जाता है। व्यापारियों को जागरूक भी किया जाता है। साथ ही जुर्माना भी वसूला जाता है। जल्द ही फिर अभियान चलाया जाएगा। -विनय कुमार मणि त्रिपाठी, ईओ बदायूं
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