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बदायूं रेलवे स्टेशन पर नहीं सतर्कता के खास इंतजाम

Sun, 20 Nov 2016 11:25 PM IST
ब्यूरो/बदायूं
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बदायूं रेलवे स्टेशन पर नहीं सतर्कता के खास इंतजाम 
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कानपुर के पास में स्थित पुखरायां के पास इंदौर-पटना एक्सप्रेस के दुर्घटनाग्रस्त होने की वजह से 121 लोगों की मौत हो चुकी है। ट्रेन दुर्घटना में इतने यात्रियों के मारे जाने के बावजूद बदायूं रेलवे स्टेशन के आसपास सुरक्षा के इंतजाम में कोई खास सतर्कता नहीं बरती गई। वहीं, रेलवे स्टेशन या आसपास कोई दुर्घटना होती है, तो उसके बाद रेलवे स्टेशन में यात्रियों को प्राथमिक चिकित्सा भी सुविधा भी नहीं मिल पाएगी, क्योंकि स्टेशन की डिस्पेंसनरी अक्सर बंद रहती है। हालांकि जिला अस्पताल एवं अन्य कई निजी अस्पताल दो किलोमीटर रेंज में स्थित हैं। 
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कासगंज से रामगंगा पुल के बीच में इन दिनों ट्रेन 110 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ रही हैं। इससे पहले 100 किलोमीटर और 75 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से चल रही हैं। सीआरएस के निरीक्षण के बाद रेल को हरी झंडी दी जा चुकी है। इसलिए रेल में फिलहाल कोई खामी नहीं है। 
वहीं, जिले में रेलवे स्टेशन पर महज एक डिस्पेंसनरी है, जिसमें इज्जतनगर मंडल से एक डॉक्टर प्रत्येक शुक्रवार को आता है, लेकिन बीते लंबे समय से उन्होंने भी नियमित आना बंद कर दिया। इससे जहां यात्रियों को प्राथमिक चिकित्सा भी नहीं मिल पाती है। वहीं, रेलवे कर्मचारियों को ऐसी सुविधाओं से महरूम होना पड़ता है। ट्रेन हादसा होने के बावजूद स्टेशन पर विशेष सतर्कता या अन्य कोई अभियान नहीं चलाया गया। ऐसा तब है, जब पहले से कई ट्रेन दुर्घटनाएं हो चुकी हैं।  
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स्थानीय स्तर पर संरक्षा और सतर्कतापूर्वक पहले की तरह ही ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है। रेल की लगातार जांच की जाती है, जिससे कि ऐसे हादसों से समय रहते बचा जा सके। 
ओपी मीना, स्टेशन अधीक्षक, बदायूं रेलवे स्टेशन 

बदायूं में हो चुकीं यह ट्रेन घटनाएं 
बदायूं। जिले में कछला पुल पर वर्ष 2014 के अंत में पुल निर्माण के दौरान क्रेन स्लिप होकर नीचे गिरने की वजह से पांच मजदूरों की मौत हो गई थी। वर्ष 2014 में शेखूपुर रेलवे स्टेशन के पास रेल फ्रैक्चर हो गया था। इसमें पटरी काटकर लकड़ी के गुटके लगा दिए गए थे। इससे वहां पर ट्रेन दुर्घटना होते-होते बच गई थी। वहीं, वर्ष 2012 में बितरोई रेलवे स्टेशन के पास इंजन डिरेल हो गया था, जिसमें तमाम यात्री घायल हो गए थे। इंजन को वहां से उठाया नहीं जा सका था। इसके बाद में इंजन को वहीं पर दफन कर दिया गया था। 

... तो अस्पतालों को कर लेते अधिकृत 
उझानी। रेलवे प्रशासन इस तरह की दुर्घटना होने पर तत्काल यात्रियों को राहत पहुुंचाने के कड़े इंतजाम रखता है। इस संबंध में स्टेशन मास्टर आरके यादव का कहना है कि यदि ऐसा कोई बड़ा हादसा होता है, तो तत्काल ही सरकारी अस्पताल एवं आसपास के अस्पतालों को सूचित कर दिया जाता है। जरूरत पडने पर निजी अस्पतालों को अधिकृत कर लिया जाता है। 
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