एक हजार और पांच सौ रुपये के नोट बंद हो जाने केे बावजूद अस्पताल, परिवहन, बिजली बिल, टेलीफोन बिल, घरेलू गैस, पेट्रोलियम पदार्थ की बिक्री में छूट दी गई थी, लेकिन जिला प्रशासन के इस ओर ध्यान नहीं देने से लोगों को परेशानी हो रही है। यही नहीं, भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता और पदाधिकारी भी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। इससे लोगों में भाजपा के प्रति रोष बढने लगा है। जिले के अधिकांश निजी अस्पतालों में बंद हो चुके नोट नहीं लिए जा रहे हैं। यहां तक क्लीनिक पर तो बंद नोट देखकर साफ मना कर दिया जाता है।
हजार पांच सौ रुपये के नोट बंद
शहर में इंदिरा चौक पर स्थित गुप्ता मैटरनिटी एवं नर्सिंग होम हजार और पांच सौ रुपये के नोट नहीं लिए जा रहे हैं। इस बारे में रिसेप्शन पर पर्ची बनाने वाले कर्मचारियों ने पूछने पर बताया। वहीं, पांच सौ रुपये का नोट देने पर करीब चार सौ रुपये की दवाई लेने पर मेडिकल मना नहीं करते हैं।
फीस में नहीं ऑपरेशन में लेते हैं बंद नोट
अशोका चौराहा पर स्थित मैटरनिटी होम में आने वाले मरीजों से फीस के रूप में पांच सौ और हजार के नोट नहीं लिए जा रहे हैं। इससे मरीजों को परेशानी हो रही है। वहीं रिसेप्शन पर बैठे कर्मचारी का कहना है यदि कोई ऑपरेशन या बड़ा केस होता है, तो बंद नोट ले लेते हैं।