बदायूं। राष्ट्रीय कवि डॉ. उर्मिलेश शंखधार की बेटी सोनरूपा विशाल ने अपनी लेखनी के दम पर साहित्य जगत में नाम रोशन किया है। देश के विभिन्न मंचों के साथ सोनरूपा अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति द्वारा अमेरिका के 24 शहरों और भारतीय उच्चायोग ब्रिटेन व आईसीसीआर द्वारा ब्रिटेन के 12 शहरों में काव्य प्रस्तुतियां दे चुकी हैं। ‘गुजरे लम्हों के दोबारा पन्ने खोल रही हूं मैं, थोड़े किस्से याद हैं मुझको थोड़े भूल गई हूं मैं’... गजल की रचनाकार सोनरूपा को प्रथम गजल संग्रह ‘लिखना जरूरी है’ के लिए उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान द्वारा वर्ष 2015 में ‘हरिवंश राय बच्चन नवोदित गीतकार सम्मान’ से सम्मानित किया जा चुका है।
यह भी मिले सम्मान:
2008 में दिल्ली की उद्धव संस्था द्वारा विशिष्ट सम्मान।
2012 में सब टीवी के कार्यक्रम वाह वाह क्या बात है में ‘कविता के छुपे रुस्तम’ सम्मान।
2012 में आधारशिला फाउंडेशन द्वारा कला श्री सम्मान।
2012 में मॉरिशस कला मंत्रालय द्वारा विशिष्ट प्रतिभा अलंकरण।
यात्रा वृतांत ‘अमेरिका और पैंतालीस दिन’ के लिए हिन्दी संस्थान का ‘जगदीश गुप्ता सर्जना सम्मान’।
2018 में वाशिंगटन में भारतीय काउंसलेट जनरल द्वारा ‘गीत गजल शिरोमणि सम्मान’।
2019 में लंदन उच्चायोग द्वारा हिन्दी के प्रचार प्रसार के लिए सम्मान एवं प्रशस्ति पत्र।
प्रदेेश सरकार साहित्य क्षेत्र में भी दे ध्यान
सोनरूपा कहती हैं कि प्रदेश सरकार साहित्य क्षेत्र की तरफ ध्यान नहीं दे रही है। जिले में कई ऐसी प्रतिभाएं हैं, जो आगे बढ़ने का हौसला रखती है। वह कहती हैं कि सरकार के स्तर से कभी भी किसी कार्यशाला का आयोजन नहीं किया जाता है, जो कहीं न कहीं मनोबल को तोड़ने वाला है। हालांकि वह अपनी तरफ से महिलाओं को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही हैं, क्योंकि कई महिलाएं अच्छा लिखती हैं, लेकिन वह उसे अपनी डायरी तक ही सीमित रखती हैं।