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पुलिस न पकड़ती तो पुजारी को खुद सजा देने के इरादे में थे गांव वाले

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बदायूं। सामूहिक दुष्कर्म और हत्या के आरोपी पुजारी सत्यनारायण दास की करतूत से गांववाले इस कदर नाराज थे कि उनके सिर पर खून सवार था और पुलिस के साथ ही वे भी उसकी तलाश में जुटे हुए थे। गनीमत रही कि वह उनके हत्थे नहीं चढ़ा वरना गांव वाले उसकी जान ले लेते। पुजारी के पकड़े जाने की बात जब गांववालों को हुई तो भारी संख्या में लोग इकट्ठे होकर मौके पर पहुंच गए और उन्होंने पुलिस वालों की बाइक घेर ली। गांववाले आरोपी को उनके हवाले करने की मांग करने लगे। आक्रोशित ग्रामीण पुलिस वालों की गिरफ्त से उसे छीन पाते इससे पहले ही मौके पर पुलिस फोर्स पहुंच गई, जिस वजह से उसकी जान बच गई।
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महिला से हैवानियत के मामले में 50 हजार के इनामी पुजारी सत्यनारायण दास को पुलिस टीमें ही नहीं गांव वाले भी तलाश रहे थे। कुछ लोग तो उसे धर्मस्थल और उसके आसपास इलाके तक में खोज आए थे, लेकिन उसका पता नहीं चला। पुलिस उसे सर्विलांस की मदद से तलाश कर रही थी। एक टीम बरेली तो एक टीम जिले के आसपास इलाके में दबिशें दे रही थी। आखिर में वह गांव के ही पास जंगल से पकड़ा गया। बताते हैं कि बृहस्पतिवार देर रात ग्रामीणों ने दो पुलिस कर्मियों को खेतों की ओर जाते देखा था तो उन्हें शक हो गया था कि पुजारी वहीं छिपा बैठा है। इस पर पुलिस कर्मियों के पीछे-पीछे तमाम लोग भी पहुंच गए। ये भी बताया जा रहा है कि वहां दो-चार ग्रामीण पहले से मौजूद थे। दोनों पुलिस कर्मियों ने जल्दबाजी करते हुए पुजारी को बाइक पर बैठा लिया, लेकिन तब तक ग्रामीणों ने उनकी बाइक चारों ओर से घेर ली। कुछ लोग कहने भी लगे कि पुजारी को उन्हें सौंप दिया जाए। बताते हैं कि उन्होंने पुजारी को बाइक से उतारने की कोशिश भी की, लेकिन तब तक पुलिस की अन्य टीमें मौके पर पहुंच गईं। इससे पुजारी की जान बच गई। यही वजह रही कि आरोपी को मेडिकल परीक्षण कराने के दौरान से लेकर जेल भेजने तक कई थानों की पुलिस मौजूद थी।
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