योगी जी, ये देख लो गेहूं खरीद का हाल
जिले में गेहूं खरीद का लक्ष्य दो लाख एक हजार मीट्रिक टन था। गेहूं क्रय केंद्र को खुले हुए एक माह से ज्यादा दिन बीत चुके है,लेकिन अब तक जिले में 56210 मीट्रिक टन की खरीद हो पाई है। जाहिर है कि खरीद 30 फीसदी भी नहीं हुई है। अब गेहूं खरीद के लिए एक माह भी नही बचा है और लक्ष्य पूर्ति के लिए 144790 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद बाकी है। यह लक्ष्य 15 जून तक पूरा होना संभव नजर नहीं आ रहा है। यह स्थिति खरीद केंद्रों की स्थापना में मनमानी और खोले गए केंद्रों पर अनियमितताओं की वजह से बनी है। तहसीलों के प्रमुख स्थानों पर इस बार केंद्र खोले ही नहीं गए। कई केंद्र इतने दूर-दराज खोल दिए गए हैं, जहां तक किसानों का पहुंच पाना मुश्किल है। नतीजतन, किसानों को मंडियों में औने-पौने दामों पर आढ़तियों को अपना गेहूं बेचने को विवश होना पड़ रहा है। गेहूं खरीद में बिचौलिए हावी हैं।
जिले में गेहूं खरीद के लिए सात एजेंसियों की ओर से 117 क्रय केंद्र खोले गए हैं। इनमें विपणन शाखा के 11, पीसीएफ के 59, यूपीएसएस के आठ, एग्रो के छह, एसएफसीके पांच, भारतीय खाद्य निगम के सात और यूपीपीसीयू के 21 गेंहू क्रय केंद्र बनाए गए हैं। इस बार अधिकारियों ने पिछले वर्षों की तुलना में कई क्रय केंद्र इधर से उधर कर दिए हैं। सुलभ स्थानों से केंद्र हटाकर दूरस्थ स्थानों पर खोल दिए गए। ललभुझिया, भदरौल, निजामावाद, बाराबिशा, बोंदरी, विजयनगला, वरामयखेड़ा, ननाखेड़ा, सलेमपुर, भदोली, डहरपुर कला, सपरेड़ा, दियोरी, रावतपुर, सथरा, त्रिलोकपुर, रसूलपुरनगला, रिजौला, माधुरीनगला, कुंवरगांव उसैहत, बौरा, डंका, इमादपुर, दियोरी, पीपला, केनी, शेरबिछालिया, अमरौली, सदुल्लागंज, खुकड़ीजयपालपुर, पिपला, बिल्सी,आदि जगहों पर गेहूं खरीद केंद्र नहीं खुलवाएं गए। जबकि इन स्थानों पर पिछले वर्षों में केंद्र रहे हैं और किसानों का यहां तक पहुंचना आसान है। अलबत्ता, जिला विपणन अधिकारी अजय कुमार का कहना है कि उन स्थानों पर केंद्र खोले गए जहां किसानों को सुविधा हो और हर जगह के किसान गेहूं खरीद केंद्र पर ला सकें लेकिन उनकी बात से किसान संतुष्ट नहीं हैं।
परेशान किसानों की जुबानी सस्ते में बिके गेहूं की कहानी
सरकारी रेट से प्रति क्विंटल डेढ़ रुपया कम पर बेचना पड़ा गेहूं
उझानी (बदायूं)। गेहूं की फसल का वाजिब दाम मुहैया कराने के लिए हुक्मरानों की ओर से कई बार दावे किए गए कि इस बार गेहूं उत्पादकों की मेहनत बिचौलियों की जेब तक नहीं पहुंचेगी लेकिन किसानों की जुबां पर आए दर्द पर गौर करें तो हकीकत कुछ और ही निकली। सेंटर दूर उन इलाकों में जाकर खोल दिए जहां पहुंचने को भाड़े के रूप में किसानों की जेब पर डाका पड़ जाता। एक तो पहले से ही लागत पर ज्यादा खर्चा हो गया, उस पर अफसरों ने इलाके में सेंटर नहीं खोलकर अनगिनत किसानों का खेल खराब कर दिया। सरकारी रेट से वंचित गेहूं उत्पादकों को किस तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा, यह बताने के लिए शनिवार को अढौली गांव के मोड़ पर सुंदरलाल साहू मिल गए। बोले- कौन किसान चाहेगा कि उसे सस्ते में गेहूं बेचना पड़े। हरेक को अच्छा रेट चाहिए। सरकार रेट तो तय कर देती है और व्यवस्था अफसर। जमीनी हकीकत से बेपरवाह अफसर असलियत पर गौर करें तो हर उस इलाके के किसान को फायदा मिलने लगेगा, जहां पर गेहूं क्रय केंद्र खोले जाने की आवश्यकता है। गद्दी टोला मोहल्ले के सुशील मौर्य कहते हैं कि गेहूं उनके खेत में भी था। पता लगा कि आसपास इलाके में सेंटर नहीं खोला गया तो मंडी जाकर करीब डेढ़ सौ रुपया प्रति क्विंटल सस्ते में गेहूं बेच आए। वैसे, सरकारी रेट 1635 रुपया प्रति क्विंटल है लेकिन मंडी में भाव 1500 सौ रुपया पार नहीं कर पाया। अढौली गांव के ही सोहनलाल का दर्द जुबां पर आया तो गुस्से से भड़क गए। बोले- फायदा तो बिचौलियों को ही होना था, सो अफसरों ने उन्हें पीछे के रास्ते से पहुंचा दिया। हुक्मरान अगर शासन के अनुरूप छोटे-छोटे कसबों की मंडियों में सेंटर खोलने की व्यवस्था करा देते तो गेहूं उत्पादकों को आर्थिक और मानसिक परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता। बता दें कि उझानी इलाके में पिछले साल क्रय एजेंसियों ने अफसरों से वार्ता कर जिन स्थानों पर गेहूं खरीद को सेंटर खोले उनमें उझानी मंडी समिति को भी तीन केंद्र मिल गए थे। उम्मीद इस बार भी थी कि सुविधा मिलेगी लेकिन अफसरों ने कोसों दूर कादरचौक, वितरोई, कछला और रिसौली में सेंटर खोलने के लिए जगह चुनी। मंडी समिति के आसपास के गांव के लोग सेंटरों पर गेहूं बेचने के लिए पहुंचने से पहले ही नुकसान में रहेंगे।
बिल्सी के किसानों को नहीं मिला गेंहू का समर्थन मूल्य
बिल्सी। क्षेत्र के किसानों की ओर से लगातार की जा रही क्रय केंद्रों को खोले जाने मांग आखिरकार पूरी नहीं हो सकी। इसके कारण क्षेत्र के किसानों को उनके गेहूं का समर्थन मूल्य नहीं मिल पाया। इससे किसानों में बेहद रोष है और वह अपना गेहूं मंडी में औने-पौने दाम पर बेचने को विवश हो गए। क्षेत्र में इस बार गेहूं की पैदावार काफी अधिक मात्रा हुई है। बावजूद इसके किसानों के हितों को दरकिनार करते हुए क्षेत्र में पर्याप्त क्रय केंद्रों को नहीं खोला गया है। यहां तक कि हर वर्ष नगर की गल्ला मंडी में कम से कम दो केंद्र खोले जाते थे, जो इस बार नहीं खुल सके। इसके कारण क्षेत्र के किसानों को मजबूरन अपना गेहूं सरकार के समर्थन मूल्य से काफी कम दामों पर बाजार में बेचना पड़ा। गौरतलब बात यह है कि बिल्सी तहसील में मात्र में तीन केंद्र खोले गए हैं, जो सभी अंबियापुर ब्लाक के तहत थे। जबकि इस्लामनगर और सहसवान ब्लाक में पड़ने वाले क्षेत्र में कोई क्रय केंद्र नहीं खोला गया है। इससे क्षेत्र के किसानों को बाहरी मंडी में जाकर अपना गेंहू बेचना पड़ रहा है। एसडीएम विधान जायसवाल का कहना है कि क्षेत्र में क्रय केंद्रों को खोले जाने को लेकर जिले के उच्चाधिकारियों को कई बार अवगत कराया गया लेकिन उनकी रिपोर्ट को भी अनसुनी कर दिया गया। क्षेत्र के किसान हरनारायन, ओमप्रकाश, महेंद्र सिंह, विजय सिंह, राहुल कुमार, ब्रजमोहन सिंह, मोरपाल, अजयपाल सिंह, दिनेश शाक्य, सोहन लाल, राजीव शर्मा आदि ने बताया प्रदेश सरकार के सारे दावे खोखले साबित हो रहे है।
किसानों की पहुंच वाले स्थानों पर न खोले केंद्र
बिसौली। भले ही योगी सरकार गेहूं खरीद केंद्रों को लेकर कितनी भी संजीदगी का दावा करे लेकिन अधिकारियों व कर्मचारियों की लापरवाही के कारण इसका लाभ किसानों को नहीं मिल पा रहा है। पूरे तहसील क्षेत्र में 12 खरीद केंद्र खोले गए हैं लेकिन तहसील मुख्यालय पर एक भी खरीद केंद्र नहीं खोला गया है। इससे तहसील मख्यालय आने वाले किसान अपना गेहूं औने पौने दामों में बेच रहा है। तहसील क्षेत्र में पपगांव, सर्वा, बेहटाकोडा, भानपुर, मुसियानगला, राजटिकोली, मंडी वजीरगंज, पीसीएफ वजीरगंज, सहकारी बगरैन और सहकारी वजीरगंज केंद्र खोले गए हैं लेकिन खरीद नियमानुसार नहीं हो पा रही है। गेहूं खरीद केंद्रों का प्रचार प्रसार न होने की वजह से किसानों को इनकी जानकारी भी नहीं है और मुख्यालय पर क्रय केंद्र न होने के कारण किसान गेहूं 1500 से 1525 की कीमत पर बेचने को मजबूर हैं। यही कारण है कि अभी तक कुल 54356 क्विंटल गेहूं खरीदा जा सका है। पूरे तहसील के खरीद का कुल कितना लक्ष्य है इस बारे में न तो मंडी सचिव को कोई जानकारी है और न ही उपजिलाधिकारी को है।
(साथ में उझानी से प्रताप यादव, बिल्सी से रविंद्र रवि और बिसौली से पंकज शर्मा )