ढाई महीने में 116 क्रय केंद्र पर 48.30 फीसदी गेहूं ही खरीदा जा सका
-क्रय केंद्रों के खोलने में मनमानी और बिचौलियों की घेराबंदी रही हावी
क्रय केंद्रों के खोलने में मनमानी और बिचौलियों की घेराबंदी ने इस बार भी जिले में गेहूं की खरीद का लक्ष्य 50 फीसदी तक नहीं पहुंचने दिया। 116 केंद्रों पर सात एजेंसियों मिलकर सिर्फ 48.30 फीसदी गेहूं की खरीद ही कर सकीं। जाहिर है कि किसानों का गेहूं फिर से मंडियों में बिक गया। एक अप्रैल से शुरू होकर गेहूं की खरीद बृहस्पतिवार 15 जून को थम गई। अब सारे गेहूं खरीद केंद्र बंद कर दिए गए हैं। इस बार जिले में दो लाख एक हजार मीट्रिक टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य था लेकिन अंतिम दिन तक सिर्फ 97080.75 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद ही की जा सकी। सात एजेंसियों में से सबसे कम खरीद यूपीएसएस ने की। इसको 23000 मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य दिया गया था। इसमें केवल 1578 मीट्रिक टन यानी 6.86 प्रतिशत ही खरीद की जा सकी। यह स्थिति तब रही जब इस इस साल सरकार ने गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य में भी 100 रुपये का इजाफा किया था। इसके बावजूद एजेंसियां जिले में किसानों को सरकारी क्रय केंद्रों तक नहीं ला सकीं तो इसकी वजह यह थी कि शुरू से ही कई क्रय केंद्र ऐसे स्थानों पर बनाए गए, जहां तक किसानों की पहुंच आसान नहीं हो सकी। ज्यादा दूर जाने से बचने की वजह से किसानों ने अपना गेहूं मंडी में ही बेचना मुनासिब समझा। माना जा रहा है कि गेहूं खरीद केंद्रों के निर्धारण में पूरी तरह से मनमानी की गई। बता दें कि गेहूं खरीद के लिए जिले में 117 क्रय केंद्र बनाए गए थे। इनमें से एक केंद्र चला ही नहीं। एक अप्रैल से शुरू हुई गेहूं खरीद 15 जून तक चली।
क्या रहा खरीद का हाल...
एजेंसी लक्ष्य खरीद
विपणन शाखा 30000 12363.90
पीसीएफ 48000 37411
एसएफसी 12000 3183.80
एग्रो 15000 6751.35
पीसीयू 38000 12940.30
यूपीएसएस 23000 1578
भारतीय खाद निगम 35000 22852.40
(मीट्रिक टन में)