दो नवंबर को हर तरफ आ रही थीं गोलियों की आवाज
दो नवंबर 1990 का दिन रामभक्तों समेत अयोध्या के लोग भी कभी भुला नहीं पाएंगे, जब हर तरफ से गोलियों की आवाज आ रही थी। केशव बताते हैं कि उस समय उनकी ड्यूटी दिगंबर अखाड़े में थी। जब बाहर गोलियां चल रही थीं तो वह लोगों को खींचकर अखाड़े में बंद कर रहे थे। उसी दौरान पुलिस ने अखाड़े में सीढ़ी लगाकर अंदर बंद लोगों को भी गोली मारनी चाही थी लेकिन ऐन वक्त पर पत्रकारों के आने ने सबकी जान बच गई।
कच्छा बनियान पहनकर पुलिस के बीच से ही निकल लिए
शहर के मढ़ई चौक निवासी केशव बताते हैं कि जब गिरफ्तारी की सूचना मिली तो जो भगवा वस्त्र पहने थे। उन्हें उतारकर कच्छा और बनियान में ही पुलिस के बीच से होकर निकल गए थे और पुलिस पहचान नहीं पाई। पूरी रात हरप्रसाद मंदिर में गुजारी। सुबह सूचना मिली कि अयोध्या जाकर काम करना है तो वहां पहुंच गए। 15 से 29 अक्तूबर 1990 तक वहां रुककर कारसेवकों को इकट्ठा करने, उनके रुकने और भोजन आदि की व्यवस्था में लगे रहे।
विहिप के आह्वान पर 30 अक्तूबर को अयोध्या में करीब दस हजार कारसेवकों के साथ अंदर घुसे तो पुलिस ने हर जगह बैरियर लगा रखे थे। एक वाकये को याद करते हुए बताते हैं कि उसी समय हनुमान मंदिर पर एक बस खड़ी दिखाई दी थी तो कारसेवकों ने बस लेकर दौड़ा दी थी जो बैरियर तोड़ते हुए घुस गई थी। कारसेवा के दौरान दो कार्यकर्ता गंभीर घायल हो गए थे तो उनके पैरों में भी कई लाठियां पड़ीं थीं।