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ज्योतिष के गूढ़ रहस्यों पर रखे तार्किक पक्ष

Sun, 17 May 2015 07:46 PM IST
badaun
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एक ऐतिहासिक अवसर था जब परशुराम विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में ज्योतिष सम्मेलन रखा गया। आयुष एवं ज्योतिष शोध केंद्र की ओर से आयोजित इस समारोह में प्रमुख शाखाओं और उनके गूढ़ रहस्यों पर निर्विवाद और सार्थक चर्चाएं हुईं। इस अवसर पर एकत्र हुए जिले और अन्य जिलों के ज्योतिषियों को शोध केंद्र की ओर से सम्मानित किया गया।
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शुभारंभ कार्यक्रम के अध्यक्ष पं. रामाशंकर भारद्वाज ने मां शारदे के चित्र पर दीप प्रज्वलन और पुष्पार्पण कर किया। मुख्य अतिथि रिटायर्ड एसडीएम शांति प्रसाद शर्मा ने कहा कि शास्त्रों से जुड़ी गतिविधियों का बदायूं में अभाव रहा है। संस्था ने ज्योतिष जैसे गूढ़ विषय पर सम्मेलन आयोजित कर प्रशंसनीय पहल की है। विद्यालय के बच्चों ने स्वागत गान प्रस्तुत किया। जिले और अन्य जिलों के ज्योतिष विद्वानों ने अंक ज्योतिष नक्षत्र विज्ञान, हस्त रेखा, गणितीय और फलित ज्योतिक के तमाम पहलुओं पर चर्चा की। कार्यक्रम के आरंभ में ही संस्था के अध्यक्ष पं. राम बहादुर पांडेय ने सभी ज्योतिष विद्वानों को सम्मान पत्र देकर और शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। आयोजन सहभागी राहुल चौबे ओर अजय कुमार मिश्र को बैज लगाए गए।
भारतीय ज्योतिष विद्या पीठ फर्रुखाबाद से पधारे ज्योतिषाचार्य पं. कृष्णकांत त्रिपाठी अक्षर ने भृगु संहिता से कई उद्धरण लिए और ज्योतिष को जन सामान्य तक पहुंचाने के सरल उपाय बताए। इससे पूर्व संस्था के अध्यक्ष पांडेय ने ज्योतिष के आध्यात्म पहलू पर प्रकाश डाला। प्रश्न ज्योतिष के विद्वान पं. राम भरोसे लाल शर्मा ने इस शस्त्र की अपनी उपयोगिता पर प्रकाश डाला। बरेली संस्कृत विद्यालय के प्राचार्य पं. नरायण दास शर्मा एडवोकेट, डॉ. शिव औतार मिश्र ने श्लोक के माध्यम से संस्कृत और ज्सोतिष शास्त्र को एक-दूसरे का पूरक बताया। इसके लिए युवाओं को संस्कृत के पाठन पाठन को प्रेरित किया। पं. गिरीश शर्मा, पं. दिनेश शर्मा, पं. सूर्यपाल शास्त्री, विश्वेरी शास्त्री, पं. राम प्रकाश शर्मा, पं. भीष्मपाल पाठक, डॉ. श्रीकांत शर्मा ने भी संस्कृत और ज्योतिष शास्त्र की आज की उपयोगिता पर प्रकाश डाला।  
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ज्योतिष शास्त्र नहीं मानता
अकाल मौत: कृष्णकांत
बदायूं। आयुष एवं ज्योतिष शोघ केंद्र द्वारा आयोजित ज्योतिष सम्मेलन के आमंत्रित ज्योतिषी कृष्ण कांत त्रिपाठी अक्षर ने कहा है कि अकाल मौत का ज्योतिष मेें कोई उल्लेख नहीं है। वह अमर उजाला से बात कर रहे थे। कहा ज्योतिष में तीन प्रकार मौत का उल्लेख है। अल्पायु, मध्यायु और दीर्घायु। जैमिनी ऋषि ने 33 वर्ष तक अल्पायु, 33 से 66 तक मध्यायु और 66 से 100 तक दीर्घायु बताई है। भारतीय कॉलेज फर्रुखाबाद में संस्कृत के प्रवक्ता कृष्णकांत त्रिपाठी ने कहा कि ज्योतिष अपने आप में विज्ञान है। उन्होंने फलित में ज्योतिषाचार्य किया है। अपने अध्ययन में पाया कि मुहूर्त पर कार्य न करने के कारण ही आज तमाम दुर्घटनाएं हो रही हैं। दो-तीन दशक पूर्व जब ज्योतिष पर विश्वास कर लोग कोई शुभ कार्य बिना ज्योतिषी से पूछे करते थे तो ऐसी घटनाएं सुनने में नहीं आती थीं। पंचतत्वों से जब शरीर का निर्माण माना जाता है तो नक्षत्रों से इस शरीर का जुड़ाव कहीं ने कहीं तो है ही। ज्योतिष के विविध रूप हैं और इसमें सामुद्रिक शास्त्र का भी विशेष महत्व है। अकाल्पनिक और अप्रत्याशित होने पर लोग ज्योतिष पर आकर्षित होते हैं जबकि मानसिक संतुष्टि और शुभता के लिए ज्योतिष का हर विशेष अवसर पर इसके संपर्क में रहना उचित होगा।
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