प्रदेश के मुखिया अखिलेश यादव सरकार द्वारा पेश किए गए अब तक के सबसे बड़े बजट में यूं तो सभी वर्गों का ध्यान रखा गया। बावजूद इसके तमाम खामियां भी रह गईं। इससे आमजनों का खासा लाभ मिलता नजर नहीं आ रहा है। शिक्षा से लेकर, स्वास्थ्य, कृषि आदि तमाम बिंदुओं पर करोड़ों रुपये खर्च करने वाले इस बजट के संबंध में विपक्षी राजनीतिक दलों के जिलाध्यक्षों और किसान यूनियन के पदाधिकारियों ने बजट को नकार दिया है। विरोधी दल के नेताओं ने इसे समाजवादी सरकार का असमाजवादी बजट करार दिया है।
किसानों की उम्मीदें हुईं धड़ाम
बहुजन किसान दल के जिलाध्यक्ष राजेश सक्सेना बड़े ही निराशाजनक अंदाज में बोले कि गन्ना किसानों के साथ गेहूं की फसल खराब होने वाले किसानों को खासी उम्मीद थी, लेकिन सारी उम्मीदें धड़ाम हो गईं।
गन्ना भुगतान दिलाने के लिए कुछ नहीं
कांग्रेस जिलाध्यक्ष साजिद अली ने कहा कि महिलाओं, युवाओं, विद्यार्थियों, अल्पसंख्यकों के लिए कुछ खास नहीं मिला। गन्ना किसानों के बकाया दिलाने के लिए इस बजट में कुछ भी नहीं है।
जन और किसान विरोधी है बजट
भाजपा जिलाध्यक्ष हरीश शाक्य का कहना है कि प्रदेश सरकार का यह बजट जनविरोधी और किसान विरोधी है। प्रदेश सरकार के इस बजट ने प्रदेश के लोगों को झटका लगाने का काम किया है।
लोकलुभावन बताकर करेंगे बंदरबांट
बसपा जिलाध्यक्ष क्रांति कुमार ने कहा कि अभी तक मूल बजट की 50 फीसदी धनराशि खर्च नहीं हो पाई। ऐसे में अनुपूरक बजट लाने की जरूरत नहीं थी। यह लोकलुभावन बजट बताकर बंदरबांट किया जाएगा।