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मेला का रूप, साधन बदले, आस्था बढ़ी

Fri, 17 Apr 2015 12:30 AM IST
वजीरगंज।
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डेढ़ सौ साल से कस्बे में लगते आ रहे ऐतिहासिक देवी मेले के प्रति श्रद्वालुओं की आस्था में बढ़ोतरी हुई है। हालांकि बदलते परिवेश में मेले का रूप और साधन बदल गए हैं।
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एक किलोमीटर की दूरी पर आवंला मार्ग पर एक टीले पर स्थित देवी मां के मंदिर पर प्राचीन काल से मेला लगता आ रहा है। पूर्व में जहां मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रम के अलावा ढोला और आल्हा जैसे कार्यक्रम होते थे। वहीं अब उनकी जगह पर डांस पार्टियां आने लगी है। वाइस्कोप के स्थान पर वीडियो थियेटर ने ली है। हालांकि मेले में ढोलक की बिक्री अभी भी जोरों पर है। इस सबके बावजूद श्रद्धालुओं में माता रानी के प्रति अभी भी पूरी आस्था विद्यमान है। हजारों श्रद्धालु प्रतिदिन यहां आकर माता रानी के दरबार में मत्था टेक रहे है। वहीं मनौतियां पूरी होने पर श्रद्धालु भंडारे करा रहे है।

खजला, जलेबी का तोड़ नहीं
म्ेाले में खजला और जलेबी की दुकानों पर ग्राहकों की खासी भीड़ जुट रही है। हालांकि मेले में फास्ट फूड के कई रेस्टोरेंट लगे हैं, लेकिन देहात क्षेत्र के लोग अभी भी खजले को महत्व दे रहे हैं।
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श्रद्वालु भजन कीर्तन में डूबे
मेले में माता रानी के दर्शन करने के लिए आने वाले श्रद्धालु दिनरात मातारानी के भजन कीर्तन करते हैं। माता रानी की कृपा का पात्र बनने के लिए भक्तगण यहां हवन भी कर रहे हैं। इसके अलावा मनौतियां पूरी होने पर श्रद्धालु भंडारा करके मेले आने वाले भक्तों को भोजन मुहैया करा रहे है।

देर रात तक गुलजार रहता है मीना बाजार
मेले के प्रसिद्ध मीना बाजार में देर रात महिलाओं की भीड़ जुट रही है। दिन में जहा ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं  खरीदारी करती वहीं शाम से देर रात नगर की महिलाओं से मीना बाजार आबाद रहता है।

युवाओं को भा रही हैं डांस पार्टियां
मेले में लगी डांस पार्टियां युवाओं की खास पंसद बनी हुई है। दोपहर से लेकर मध्य रात्रि तक युवा डांसरों के नृत्य का भरपूर आनंद ले रहे है। तीस मिनट के शो में मदहोश युवा दिलखोल कर पैसे भी लुटा रहे हैं।
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