अगस्त महीना में बोलेरो समेत अगवा कर ड्राइवर राकेश यादव की हत्या के मामले में मृतक के घरवालों ने पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए आईजी जोन को शिकायत भेजी है। आरोप है कि पुलिस ने नामजद को गिरफ्तार कर कंकालनुमा शव तो बरामद कर लिया लेकिन आरोपियों की गिरफ्तारी में दिलचस्पी नहीं दिखाई। मृतक घरवालों ने आरोपियों से जानमाल का खतरा बताकर कार्रवाई की गुहार लगाई है।
मुजरिया थाना क्षेत्र के गांव रम्पुरा निवासी आराम सिंह यादव के बेटे राकेश के लिए 30 अगस्त को मय बोलेरो अगवा कर लिया गया था। घटना को बोलेरो की बुकिंग के नाम पर अंजाम दिया गया था। पुलिस ने हालांकि तीसरे दिन उघैती थाना क्षेत्र के गांव भगतानगला निवासी नेत्रपाल के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया लेकिन उस वक्त कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। जबकि अपहरणकर्ताओं ने बोलेरो को बेचने की नीयत से ड्राइवर राकेश की हत्या कर शव गुन्नौर थाना क्षेत्र में गांव खिरकवारी के पास जंगल में फेंक दिया था। नामजद नेत्रपाल पुलिस के हत्थे चढ़ा तो पुलिस ने राकेश का कंकालनुमा शव सात अक्तूवर को बरामद कर लिया था।
मृतक के पिता ने बताया कि नेत्रपाल ने पुलिस को घटना में शामिल अपने साथियों के नाम भी बता दिए थे। पूछताछ के आधार पर पुलिस ने केस में नेत्रपाल के मौसेर भाई संभल जिले में गुन्नौर के गांव रसूलपुर निवासी रामसेवक और रामनाथ, रामनाथ के बहनोई धनारी क्षेत्र के गांव राजेंद्र और नेत्रपाल के लिए सुरागरसी करने वाले बिल्सी थाना क्षेत्र के गांव वाकरपुर निवासी किशपाल के नाम शामिल कर लिए।
राकेश की हत्या में मुख्य आरोपी की रखैल का नाम भी आया था जिसे पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। आरोप है कि किशनपाल ने मृतक के पिता को रिश्तेदार के माध्यम से धमकी भी दी है। इसकी शिकायत थाना पुलिस से भी की जा चुकी है। इधर, प्रभारी निरीक्षक रामलखन यादव का कहना है कि आरोपियों की तलाश में दबिश दी गई थी लेकिन कोई नहीं मिला।