सात महीने पहले समायोजित हुए शिक्षामित्र अब वेतन पाने के लिए विभाग के चक्कर काट रहे हैं। वेतन तो दूर उनसे ढंग से बात तक करने को कोई तैयार नहीं है, जबकि उनका सत्यापन भी होकर आ चुका है। परेशान शिक्षक रोजाना दफ्तर आ रहे हैं। आरोप है कि न तो पटल पर बाबू मिलते हैं और न ही अधिकारी सुनते हैं।
लंबे संघर्ष के बाद शिक्षामित्र को शिक्षक पद पर समायोजित किए जाने की कार्रवाई प्रदेश में शुरू की गई। जिले में पहले चरण में 1,119 शिक्षामित्रों को समायोजित किए जाने की कार्रवाई की गई। अगस्त में ज्वाइनिंग भी करवा दी गई। बाद में धरना-प्रदर्शन करने के बाद इनके दस्तावेजों का सत्यापन कराना शुरू कराया गया। तब से लेकर अब तक चार माह हो गए हैं। बेसिक कार्यालय के बाहर मिले पांच नियमित शिक्षामित्रों का आरोप है कि सत्यापन आने के बाद भी उनका वेतन नहीं लगाया जा रहा है, जबकि सब कुछ ओके हैं। ढंग से कोई बात करने तक को तैयार नहीं है।
विभागीय लोगों का कहना है कि संपूर्णानंद विश्वविद्यालय के सत्यापन में सबसे अधिक देरी लगी है। लिहाजा वेतन नहीं लग सका। ऐसे लोग करीब सवा सौ हैं। कई की संदिग्ध भी लगी। इसलिए बीईओ को भेजा गया है। बीएसए कृपाशंकर वर्मा ने बताया कि सभी का वेतन लगाया जा रहा है। कुछ लोगों की मार्कशीट का सत्यापन संदेहास्पद था। लिहाजा खंड शिक्षा अधिकारी को सत्यापन के लिए भेजा है। इसके आते ही वेतन लगाने की कार्रवाई की जाएगी।