उझानी (बदायूं)। अमर उजाला फाउंडेशन के अपराजिता-100 मिलियन स्माइल्स अभियान के तहत ‘देश हमारा हिंदुस्तान, हिंदी है हमारी जान’ विषय पर बसोमा के रजत बाल विद्या मंदिर में आयोजित कार्यक्रम में हिंदी को देश की शान और मान का प्रतीक बताया गया। कहा गया कि बोलोगे हिंदी तो बढ़ेेगा मान पर जोर देते हुए उसे बढ़ावा देने की बात भी की गई। सबसे सरल और सबसे अच्छी भाषा के प्रति अगर समाज में जागरूकता का माहौल नहीं बना तो बच्चे अच्छे संस्कार हासिल नहीं कर पाएंगे। मैं हूं हिंदी वतन की बचा लो मुझे... कविता यही संदेश देती है कि भाषाई ज्ञान के बीच फंसी हिंदी के प्रति लोगों में विश्वास की कमी रही तो आने वाले समय में दिक्कत भी बढे़गी।
कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलन के साथ हुई। सांईनाथ कॉलेज ऑफ टीचर एजुकेशन के विभागाध्यक्ष नवीन कुमार ने कहा कि हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा है। यही एक ऐसी भाषा है जिसके बगैर दैनिक बोलचाल से लेकर सरकारी कामकाज तक अधूरा महसूस किया जाता है। शुद्ध हिंदी लिखना भी एक कला है। इसके लिए व्याकरण का ज्ञान आवश्यक है। इसका बोध प्राथमिक पढ़ाई के दौरान होने लगता है। एपीएम पीजी कॉलेज के चीफ प्रॉक्टर त्रिवेंद्र सिंह ने कहा कि हिंदी ही एक ऐसी भाषा है जिस पर हिंदुस्तानी गर्व करता है। इसका शब्दकोष भी सरल है। संस्कारों में भी इसी का समावेश है। गुड मॉनिंग की जगह कोई अगर अपने से बड़े को प्रणाम करता है तो मन प्रफुल्लित हो उठता है। सरकारी कामकाज में हिंदी का जिस तरह से इस्तेमाल होता है, वह अभी उम्मीद के अनुरूप कम है। अंग्रेजी पढ़िए लेकिन हिंदी को भूलना आगे चलकर नुकसानदेह साबित होगा।
सांईनाथ कॉलेज ऑफ टीचर एजुकेशन की प्रवक्ता रूपम राजोरिया ने भी हिंदी को बढ़ावा देने की बात कही की। कहा कि हिंदुस्तान में नहीं तो फिर कोई और देश इसे बढ़ावा क्यों देगा। इंस्पेक्टर विनोद कुमार चाहर ने कहा कि मल्टी सिटी से लेकर गांव के गलियारे तक हिंदी को ही आगे करके बात करनी चाहिए। विद्या मंदिर के प्रबंधक शिवकुमार गुप्ता और प्रधानाचार्या अर्चना गुप्ता ने भाषाई ज्ञान पर पक्ष रखा। मैं हूं हिंदी वतन की बचा लो मुझे... कविता के माध्यम से भी यही संदेश दिया गया कि हिंदी के प्रति उदासीनता हिंदुस्तानियों के लिए अच्छी बात नहीं कही जा सकती। समापन पर छात्राओं ने भी हिंदी को बढ़ावा देने का संकल्प लिया। संचालन रजत गुप्ता ने किया।
कोतवाल ने दिया अफवाहों पर गौर न करने का संदेश
उझानी। कोतवाल विनोद कुमार चाहर ने पिछले दिनों फैली बच्चा चोरी की अफवाहों के प्रति छात्र और छात्राओं को सजग रहने की सलाह दी। कहा कि कहीं पर भी ऐसी कोई घटना नहीं हुई है लेकिन कुछ शरारती लोग अफवाहें फैलाकर समाज में अजीब तरह का माहौल बनाना चाहते हैं। ऐसे लोगों पर विश्वास नहीं करना चाहिए। बच्चे ही अपने घरों पर अभिभावकों समेत मोहल्ले के लोगों को भी अफवाहों पर विश्वास न करने के लिए जागरूक कर सकते हैं।
सामूहिक पहल से बनेगा माहौल
हिंदी के प्रति लोगों में अभी और विश्वास बढ़ाने की जरूरत है। कुछ लोग दिखावे के लिए अंग्रेजी में बातचीत करते हैं। उन्हें भी सामूहिक पहल का हिस्सा बनना चाहिए। हिंदी के प्रति वास्तविक माहौल तो सामूहिक पहल से ही बनेगा।- कीर्ति, छात्रा
हिंदी को विश्वभर में मिलता है सम्मान
हमारे देश के राजनेता अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर गोष्ठियों और सेमीनारों में पहुंचते हैं तो वह हिंदी बोलने से गुरेज नहीं करते। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने संयुक्त राष्ट्र संघ में हिंदी में विचार रखकर देश का मान बढ़ाया था। अब तो पूरे विश्व में सम्मान बरकरार है।
- हंसमुखी, छात्रा
सम्मान की प्रतीक है हिंदी भाषा
हिंदी ने मान और सम्मान दिलाने का काम किया है। घर में हो या फिर कहीं और हिंदी में बात करते हुए हर कोई गौरवान्वित महसूस करता है। ठीक वैसे ही जैसे कोई हमें सम्मानित कर रहा हो। कार्यक्रमों के जरिए भी इसे बढ़ावा दे सकते हैं।
- प्रियंका गुप्ता, शिक्षिका।
ऋषि-मुनियों ने भी हिंदी को अपनाया
राजा-महाराजा और ऋषि-मुनियों ने हिंदी को ही अपनाया था। तब संदेश जाया करते थे लेकिन अब उन्हें मैसेज कहा जाता है। दोनों में कोई अंतर नहीं लेकिन संदेश कहते हुए गौरव महसूस होता है। हिंदी पढ़कर ही विद्वानों की संख्या में वृद्धि हुई है।
-मनोज यादव, अध्यापक