बिनावर (बदायूं)। ‘अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाना एक जंग है लेकिन महिलाएं अगर अत्याचार सहती हैं तो इसका मतलब वे डरी नहीं हैं। ये उनकी शिक्षा और संस्कार है कि वे सहना जानती हैं। वे आवाज उठाती हैं तो उनके पीछे हजारों लोगों के हाथ होते हैं। जो ठान लेती हैं, तो अपनी मंजिल पाकर रहती हैं। बस, उनमें हौसला बढ़ाने की जरूरत है। आज सती प्रथा, बाल विवाह जैसी कुप्रथा खत्म हो गई है। ये महिलाओं में बढ़ते शिक्षा के स्तर का ही नतीजा है’।
बुधवार को बिनावर थाना क्षेत्र के ग्राम मोहम्मदपुर ब्यार में आयोजित अमर उजाला फाउंडेशन के अपराजिता-100 मिलियन स्माइल्स अभियान के तहत हुए कार्यक्रम में मुख्य अतिथि तहसीलदार रामनारायन सिंह ने यह विचार रखे। सरस्वती पूजन करते हुए उन्होंने कार्यक्रम की शुरूआत की। कहा कि आज हमारा समाज जितना आगे बढ़ रहा है। उसमें कुछ ऐसे लोग भी हैं, जो समाज को गंदा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर महिलाओं या छात्राओं के साथ रास्ते में कुछ होता है तो सबसे पहले पुलिस को सूचना दें। महिलाओं या छात्राओं को उनसे लड़ने की जरूरत नहीं है। उनके खिलाफ कार्रवाई पुलिस करेगी। हर समस्या का समाधान लड़ना नहीं है, फिर भी आत्मरक्षा का ध्यान रखें।
विशिष्ट अतिथि बिनावर एसओ हरिभान सिंह राठौड़ ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं और लड़कियों को प्रत्येक कार्य करने पड़ते हैं, जिसमें खेत से लेकर घर तक के कार्य शामिल हैं। उनके स्कूल नजदीक नहीं होते, जिससे उन्हें अकेले भी निकलना होता है। अगर रास्ते में कोई परेशान करे तो सबसे पहले शोर मचाकर लोगों को एकत्र कर लें। तुरंत पुलिस को सूचना दें। बाकी आत्मरक्षा के गुर जरूर सीखें। मनचलों से कैसे निपटना है, उन्हें हर पैंतरा आना चाहिए। सभी छात्राएं यूपी-100, 1090 और थाने के नंबर याद रखें। उन्होंने कहा कि सभी छात्राएं एक बात हमेशा याद रखें, जब भी उनके परिवार वाले बाइक लेकर निकलें, तब उन्हें बगैर हेलमेट के बाहर निकलने नहीं दें, जिससे उनके साथ कभी हादसा न हो। इस दौरान प्रबंधक नीरज कुमार शर्मा, प्रधानाचार्य मोहित कुमार साहू, धीरज कुमार शर्मा, प्रभानंदन शर्मा, हाकिम सिंह, विनय कुमार सिंह चौहान, रामचरन पाल, अवधेश कुमार, जीशान अली, राजवीर साहू, विमल मिश्रा, शगुफ्ता, सीमा सिंह, नाजमा बेगम आदि मौजूद रहे।
स्कूल में लगवाएं शिकायत पेटिका
-तहसीलदार रामनारायन सिंह बोले कि प्रत्येक स्कूल में शिकायत पेटिका जरूर होनी चाहिए। उसकी चाबी प्रधानाचार्य के पास रहे। घरेलू और बाहरी मामलों के अलावा स्कूल में भी कुछ ऐसी बातें होती हैं, जो छात्राएं नहीं कह पातीं। वे शिकायती पत्र के माध्यम अपनी बात कह