बदायूं। वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंतिम दिनों में सोमवार को रसोई गैस उपभोक्ताओं में सिलिंडर बुकिंग को लेकर जबरदस्त आपाधापी देखने को मिली। घरेलू उपभोक्ताओं को सालभर में मिलने वाले 15 सिलिंडरों का वार्षिक कोटा मंगलवार को समाप्त हो रहा है। ऐसे में सोमवार को जिलेभर में करीब 13 हजार उपभोक्ताओं ने एक ही दिन में गैस सिलिंडर की बुकिंग कराई, इससे गैस एजेंसियों पर अचानक दबाव बढ़ गया।
जिले में इस समय कुल 6,60,228 घरेलू गैस कनेक्शन उपभोक्ता हैं, इनकी आपूर्ति 53 गैस एजेंसियों के माध्यम से की जाती है। सामान्य दिनों में जहां प्रतिदिन बुकिंग की संख्या सीमित रहती है, वहीं वित्तीय वर्ष के अंतिम दिनों में यह संख्या तेजी से बढ़ गई है। जिले में प्रतिमाह औसतन करीब 4 लाख 40 हजार घरेलू गैस सिलिंडरों की खपत होती है, लेकिन मार्च के अंतिम सप्ताह में यह आंकड़ा और अधिक बढ़ जाता है।
इस अचानक बढ़ी मांग के चलते कई गैस एजेंसियों पर उपभोक्ताओं की भीड़ देखी गई। कहीं-कहीं उपभोक्ताओं को लंबा इंतजार भी करना पड़ा। एजेंसी संचालकों का कहना है कि बढ़ती बुकिंग के कारण डिलीवरी व्यवस्था पर भी असर पड़ रहा है और समय से आपूर्ति सुनिश्चित करना चुनौती बनता जा रहा है।
वहीं, दूसरी ओर व्यावसायिक गैस उपभोक्ताओं की स्थिति और भी चिंताजनक बनी हुई है। जिले में 862 कमर्शियल कनेक्शन धारक हैं, जो प्रतिमाह करीब 4500 सिलिंडरों की खपत करते हैं। वर्तमान में इन उपभोक्ताओं को नियमित आपूर्ति नहीं मिल पा रही है। उन्हें पहले डिमांड जमा करनी पड़ रही है, इसके बाद कंपनी स्तर से स्वीकृति मिलने पर ही सिलिंडर उपलब्ध हो पा रहे हैं।
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होटल, ढाबा, रेस्टोरेंट का कारोबार प्रभावित
इस स्थिति के चलते होटल, ढाबा, रेस्टोरेंट और अन्य छोटे-बड़े व्यवसाय प्रभावित हो रहे हैं। व्यापारियों का कहना है कि सिलिंडर की अनियमित आपूर्ति के कारण उनके कामकाज पर असर पड़ रहा है और लागत भी बढ़ रही है। उन्होंने प्रशासन और संबंधित कंपनियों से आपूर्ति व्यवस्था को जल्द सुचारु करने की मांग की है। विशेषज्ञों का मानना है कि हर वर्ष वित्तीय वर्ष के अंत में इस प्रकार की स्थिति उत्पन्न होती है।-
वर्जन-
31 मार्च के साथ ही वर्तमान वित्तीय वर्ष का कोटा समाप्त हो जाएगा। इसके बाद एक अप्रैल से नए वित्तीय वर्ष का कोटा लागू हो जाएगा। उन्होंने कहा कि जिन उपभोक्ताओं ने अभी तक अपने 15 सिलिंडरों का पूरा उपयोग नहीं किया है, वे अंतिम समय में बुकिंग कराने के लिए एजेंसियों और ऑनलाइन माध्यमों का सहारा ले रहे हैं। - सतीश कुमार मिश्रा, जिला पूर्ति अधिकारी