शहर से दातागंज जाते वक्त आपको कोई सुंदर स्कूल देखकर रुकते हैं, वहां के सुंदर एवं स्वच्छ भवन को देखते हैं। स्कूल के अंदर जाने पर परिसर में आपकों क्यारी एवं अन्य पेड़ पौधे सुसज्जित तरीके से लगे मिलते हैं। साथ ही विद्यालय के सभी कक्षों के अपने अलग नाम हैं, तो समझ जाइए कि आप जगत ब्लाक के उच्च प्राथमिक विद्यालय आमगांव में पहुंच गए। आपको कॉन्वेंट स्कूलों के जैसा भवन ही नहीं, बल्कि शिक्षा का स्तर भी बेहतर मिलेगा।
कक्षाओं में प्रवेश करते ही सभी छात्र-छात्राएं खड़े होकर गुड मॉर्निंग बोलते हुए अभिवादन करेंगे। आपके बैठने का इशारा करने पर थैंक्स कहेंगे। यही नहीं, पाठ्यक्रम से संबंधित तमाम प्रश्नों के उत्तर बड़ी सादगी से देंगे। कुछ ऐसा पढ़ाई का माहौल उच्च प्राथमिक विद्यालय आमगांव का है। यह चंद रोज में नहीं, बल्कि यहां की शिक्षका संगीता सक्सेना की साढ़े छह साल की कड़ी मेहनत का नतीजा है। उन्होंने विद्यालय का अंतकरण (शिक्षा) और बाह्यकरण (भवन) दोनों को ही चमका दिया। इसमें उनका साथ छात्र-छात्राओं के अभिभावकों ने भी दिया।
संगीता सक्सेना ने 27 मार्च 2010 को स्कूल में ज्वाइन किया था, तब विद्यालय की स्थिति बदहाल थी। इसके बाद लगातार सुधार किया तो अब छात्र संख्या 74 तक पहुंच गई है, जिसमें उपस्थिति 95 फीसदी तक रहती है। यह रजिस्टर नहीं, बल्कि वहां पर मौजूद छात्र-छात्राएं खुद ही बयां करते हैं। अब तक वह अकेले ही शिक्षण कार्य करती थीं, लेकिन अभी हाल में एक अन्य शिक्षक की तैनाती कर दी गई थी।
दातागंज क्षेत्र के गांव सलेमपुर में एक जनवरी 1974 को जन्मीं संगीता की हाईस्कूल तक शिक्षा दातागंज और इसके बाद स्नातक और दो विषयों से परास्नातक दास डिग्री कॉलेज से की, जबकि बीटीसी डायट से की। दास डिग्री कॉलेज के दो शिक्षक प्राचार्य डॉ. गौड़ और डॉ. वीके शर्मा को अपना आदर्श मानते हुए विद्यालय को चमकाने का काम किया, तो उनका स्कूल आज जिले के श्रेष्ठ स्कूलों में शुमार किया जाता है। इसी वजह से अब तक ब्लाक, तहसील और जिला स्तर पर सम्मानित की जा चुकी हैं।
मीना मंच से जगाई बालिका शिक्षा की अलख
बदायूं। स्कूल का मीना मंच एकदम अलग महत्व रखता है। इस मंच से गांव में बालिका शिक्षा की ऐसी अलख जगाई है, कि गांव की अधिकांश लड़कियां शिक्षा ग्रहण कर रही हैं। मीना मंच की छात्राएं तमाम जागरूकता कार्यक्रम कर चुकी हैं, जिससे उन लोगों डीएम और एसएसपी पुरस्कृत कर चुके हैं।