बदायूं। जनपद में बेधड़क दौड़ रहीं निजी एंबुलेंसों का अब कोई नियम नहीं है। एंबुलेंस से जाने वाला मरीज किस हालत में है और कैसी सांसें चल रही हैं यह देखकर ही किराया वसूला जा रहा है। जहां रात होती है तो उनके मीटर का चार्ज भी खुद ही बढ़ जाता है। इतने पर भी यह नहीं देखा जाता है कि एबुंलेंस में मरीज के लिए सुविधाएं हैं या नहीं। ऐसी कई एंबुलेंस बिना मानक के धड़ल्ले से दौड़ रहीं हैं, मगर इन्हें चेक नहीं किया जा रहा है।
एंबुलेंस में नियमों के मुताबिक प्राथमिक इलाज की समुचित व्यवस्था होनी चाहिए। ऑक्सीजन बेहद जरूरी है। इनके अलावा फार्मेसिस्ट या वार्ड ब्वाय का होना भी आवश्यक है, जिससे मरीज की रास्ते में हालत बिगड़ने पर उसे उपचार दिया जा सके। लेकिन जिले में कई ऐसी एंबुलेंस बेधड़क होकर दौड़ रहीं हैं, जिनमें मानक के अनुसार साधन ही नहीं है। न तो उनमें स्ट्रेचर की व्यवस्था है और न ही ऑक्सीजन सिलिंडर लगे हैं। कई एंबुलेंस तो केवल टैक्सी की तरह मरीजों को इधर से उधर ले जाने का काम रही हैं। इतने पर किराये से कोई समझौता नहीं। मरीज की सांसें देखकर ये एबुंलेंस चालक हॉस्पिटल तक का किराया तय करते हैं। जितना मरीज गंभीर उतना ही ज्यादा ये लोग किराया भी वसूल लेते हैं।
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जिला अस्पताल पर हैं निजी एंबुलेंस चालकों का कब्जा
-जिला अस्पताल में प्राइवेट एंबुलेंस चालकों ने कब्जा जमा लिया है। यहां से जो भी मरीज रेफर होते हैं। इनके चालकों को पहले पता चल जाता है। उसके बाद चालक तुरंत एंबुलेंस लेकर अस्पताल पहुंच जाते हैं। बताते हैं कि एंबुलेंस चालकों की कुछ कर्मचारियों से अच्छी खासी सेटिंग है। वह चालकों को फोन करते हैं। इसका उन्हें कुछ प्रतिशत भुगतान भी किया जाता है।
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टैक्सियों को दे दिया एंबुलेंस का रूप, हो चुकी हैं खटारा
-जिला अस्पताल या उसके आसपास खड़ी होने वाली कई एंबुलेंस खटारा हो चुकी हैं। उनकी सीटें तक सुरक्षित नहीं हैं। जीवनरक्षक इंतजाम नहीं है। कई एंबुलेंसों में ऑक्सीजन सिलिंडर भी नहीं है। वह कहां पंक्चर हो जाएं, ये भी नहीं कहा जा सकता। सूत्र तो यहां तक बताते हैं कि कई वाहन चालकों ने अपनी टैक्सियों को भी एंबुलेंस का रूप दे दिया है और वे सवारियां ढोने का काम कर रही हैं। एंबुलेंस की तरह दिखने वाली इन टैक्सियों से सवारियां ढोने के अलावा अन्य काम भी लिए जाते हैं। एंबुलेंस देखकर पुलिस भी इन्हें नहीं रोकती।
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एंबुलेंस में ये सुविधाएं जरूरी
-एक एंबुलेंस में प्रमुख रूप से ऑक्सीजन जरूरी है। इसमें दो तरह से सिलिंडर होते हैं। ए टाइप का छोटा और बी टाइप का बड़ा ऑक्सीजन सिलिंडर होता है। पल्स ऑक्सीमीटर, ग्लूकोमीटर, सक्शन डिवाइस, स्टेथिस्कोप, बीपी इंस्टूमेंट आदि होना जरूरी है।
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जिले में एंबुलेंस की संख्या -
108 एंबुलेंस- 36
102 एंबुलेंस- 41
एएलएस- दो
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ऐसे मिलेगी सरकारी एंबुलेंस की सुविधा
-किसी मरीज को अस्पताल पहुंचाने के लिए 108 नंबर डायल करें। एंबुलेंस के कंट्रोल रूम से नाम पता और घटनास्थल पूछा जाएगा। वहीं कुछ देर में एंबुलेंस पहुंचेगी, जिससे संबंधित मरीज को जिला अस्पताल या नजदीकी सरकारी अस्पताल पहुंचाया जा सकता है। इसके अलावा मरीज को रेफर करने के लिए भी 108 एंबुलेंस की मदद ले सकते हैं लेकिन इस दौरान कंट्रोल रूम से रेफर करने वाले चिकित्सक से बात करानी होगी। चिकित्सक कुछ सावधानियां बताएंगे। जिससे रास्ते में ईएमटी उनका पालन कर सकें।
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मरीज को अस्पताल पहुंचाना है या अस्पताल से रेफर कराना है, तो 108 एंबुलेंस नंबर पर कॉल करें। किसी गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचाने के लिए 102 एंबुलेंस है। इसके लिए मरीज को कोई पैसा खर्च करना नहीं होता है। वह नियम के मुताबिक कॉल करे, कॉल रिसीव करने वाले को सही नाम पता बताएं, जिससे एंबुलेंस संबंधित स्थान पर पहुंच सके। प्राइवेट एंबुलेंस प्रयोग न करें। सरकारी एंबुलेंस का नंबर डायल करें।
रोहित यादव, जिला प्रभारी 108 व 102 एंबुलेंस