उझानी। जिले में बी- पैक्स की नवगठित चारों समितियों के निदेशक मंडल के बाद सभापति और उपसभापति के निर्वाचन की प्रक्रिया बृहस्पतिवार दोपहर पूरी हो गई। प्रदीप कुमार सिंह हजरतगंज, गायत्री देवी बसंतनगर, सोबरन सिंह सिरासौल और नेत्रपाल को वैन बी पैक्स का निर्विरोध सभापति चुन लिया गया। इससे पहले सचिवों ने भी कार्यभार संभाल लिया है।
सहकारी क्रय- विक्रय समिति के पंखा रोड स्थित कार्यालय परिसर में सभापति और उपसभापति के निर्वाचन की प्रक्रिया सुबह में करीब 10 बजे शुरू हुई। चुनाव अधिकारी वीरेंद्र सिंह यादव की देखरेख में तीन सदस्यीय कमेटी के सामने आमराय का माहौल बना तो मतदान की नौबत नहीं आई। निदेशक मंडल के सदस्यों ने हजरतगंज बी- पैक्स के लिए प्रदीप कुमार सिंह को सभापति, मधुबाला शर्मा को उपसभापति, बी- पैक्स बसंतनगर में गायत्री देवी को सभापति, मुकेश पटेल को उपसभापति, सिरासौल के लिए सोबरन सिंह सभापति और अरविंद कश्यप को उपसभापति, वैन की बी- पैक्स के लिए नेत्रपाल शाक्य सभापति और रामवती दिवाकर को उपसभापति निर्विरोध चुन लिया।
भाजपा सहकारिता प्रकोष्ठ के जिला संयोजक किशनचंद्र शर्मा ने नवनिर्वाचित चारों सभापति और उपसभापति को प्रमाण पत्र सौंपे जाने के बाद उन्हें दायित्व का बोध भी कराया। क्रय- विक्रय के प्रभारी रावेंद्र कुमार ने बताया कि विभागीय स्तर से एक दिन ही चारों बी- पैक्स पर सचिवों को नियुक्त कर दिया गया है। सचिव सुरेंद्र पाल शर्मा को सिरासौल और वैन, बसंतनगर में प्रियंका शर्मा और भगवान सिंह ने हजरतगंज का कार्यभार संभाल लिया है। एक दिन पहले ही निदेशक मंडल का चुनाव भी हुआ था।
फिलहाल किराये के भवन में संचालित होंगी समितियां
- सहकारी क्रय- विक्रय समिति के प्रभारी रावेंद्र शर्मा ने बताया कि बदायूं जिले में अभी चार और बी- पैक्स का गठन होना है। इसके लिए भी कार्रवाई चल रही है। नवगठित बी- पैक्स हजरतगंज, वैन, सिरासौल और बसंतनगर के लिए अभी गोदाम और कार्यालय नहीं बने हैं। फिलहाल किराये के भवन में कार्यालय और गोदाम के संचालन होगा। इसके लिए सचिव और सभापतियों ने भवन तलाश लिए हैं। विभागीय स्तर से भवनों का निर्माण भूमि का चयन होने के बाद ही कराया जाएगा।
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इसे कहते हैं बी- पैक्स
- किसानों को खाद, बीज समेत अन्य वस्तुएं विक्रय करने के लिए किसान सेवा सहकारी समिति बनाई गई। बी- पैक्स (साधन सहकारी अभियान) भी इसी का एक हिस्सा है। पूर्व सभापति अजय तोमर ने बताया कि सामान्यत: इसे बहुउद्देशीय प्राथमिक ग्रामीण सहकारी समिति लिमिटेड के रूप में जाना जाता है। इसके जरिये शासन की मंशा न्याय पंचायत स्तर पर किसानों को बेहतर सुविधा मुहैया कराने की है।