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गनीमत रही कि हो गई बारिश, नहीं तो सांस लेना भी हो जाता मुश्किल

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बदायूं। पहले से प्रदूषित हवा को दिवाली की आतिशबाजी ने और जहरीला बना दिया था। गनीमत रही कि रविवार की शाम बारिश हो गई और एक्यूआई (वायु गुणवत्ता सूचकांक) में करीब 300 अंकों की गिरावट दर्ज की गई है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, अब स्थिति सामान्य है। अगर बारिश न होती तो हवा सांस लेने के योग्य भी न रहती। बारिश होने से वायु मंडल में घुले धूल और धुआं समेत उत्सर्जित गैसों के कणों के बूंदों के साथ जमीन पर आने से वायु की गुणवत्ता सुधरी है।
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बदायूं जिला एनसीआर और बरेली, मुरादाबाद, शाहजहांपुर से सटा हुआ है। इसके बाद भी यहां हवा की गुणवत्ता मापने के लिए एअर क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम नहीं है। ऐसे में मौसम वैज्ञानिक प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड मुरादाबाद के आंकड़ों और सैटेलाइट संदेशों के जरिए यहां प्रदूषण की स्थिति का आंकलन करते हैं। मौसम वैज्ञानिक आलोक सागर गौतम का कहना है कि शनिवार को दीपावली की आतिशबाजी के बाद रविवार सुबह होने तक बदायूं में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 400 के पार होने का अनुमान था। यह बेहद हानिकारक है। रविवार रात हुई बारिश के बाद इसमें काफी गिरावट दर्ज की गई। सोमवार सुबह एक्यूआई 100 के आसपास था जो दोपहर बाद बढ़कर 150 के पार हो गया। मौसम और पर्यावरण के जानकारों का कहना है कि यह सामान्य स्थिति है लेकिन फिर से एक्यूआई में इजाफा होने की बात से इंकार नहीं किया जा सकता। ग्रीन हाउस गैसों नाइट्रस ऑक्साइड, मीथेन, फ्लोरोकार्बन, कार्बन डाइऑक्साइड का फिर से उत्सर्जन बढ़ने के साथ एक्यूआई में इजाफा होने लगेगा। मौसम और पर्यावरण के जानकारों का कहना है कि वायु प्रदूषण खत्म करने का कोई स्थाई हल नहीं है। इसके लिए सिर्फ लोगों को पर्यावरण के लिए अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूक होने की जरूरत है। ऐसा न होने पर आने वाले सालों में स्थिति नियंत्रण से बाहर हो जाएगी।
वायुमंडल को फायदा, लेकिन जमीन को होगा नुकसान
- पिछले दिनों वायु प्रदूषण उच्चतम स्तर पर पहुंच गया था। मौसम के जानकारों का कहना है कि प्रकृति बैलेंस बनाती है। ऐसे में दीपावली के अगले दिन शाम को बारिश हुई। इससे वायु प्रदूषण काफी कम हो गया है, लेकिन यही वायु प्रदूषण जमीन को नुकसान पहुंचाएगा। दरअसल, बारिश की बूंदों के साथ वायुमंडल में घुले जहरीली गैसों के कण बारिश के बाद जमीन पर आ जाते हैं। इससे जमीन की उर्वरक शक्ति कम होती है। जिन क्षेत्रों में इस बारिश को अम्लीय बारिश माना गया है। वहां जमीन की उर्वरक क्षमता कम होगी। आने वाले सालों में यह और भी नुकसानदेह साबित होने वाला है।
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घातक स्तर पर पहुंच रहा वायु प्रदूषण
ग्रीन हाउस गैसों नाइट्रस ऑक्साइड, मीथेन, फ्लोरोकार्बन, कार्बन डाईऑक्साइड गैसों का उत्सर्जन काफी बढ़ने के कारण स्थिति बेहद खराब हो चुकी थी। प्रदूषण तत्व पीएम 2.5 और पीएम 10 की सांद्रता कम होने के बाद ही वायु की गुणवत्ता में सुधार संभव है। बारिश होने के कारण वायु मंडल में घुले जहरीली तत्व पानी की बूंदों के साथ पृथ्वी पर आ गए हैं। इससे वायु की गुणवत्ता सुधरती है, लेकिन इन तत्वों के जमीन में मिलने के कारण भूमि की उर्वरक शक्ति प्रभावित होगी। दिल्ली और एनसीआर में तो वर्षा के पानी के साथ प्रदूषण इतना घुल गया था कि इसे अम्लीय वर्षा माना गया है।
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- डॉ. आलोक सागर गौतम, मौसम वैज्ञानिक
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