उझानी (बदायूं)। बेमौसमी सब्जियों को उगाने के लिए स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र में नौ लाख रुपये की लागत से पॉली हाउस का निर्माण कार्य शुरू हो गया है। यहां सब्जी फसलों को हर मौसम में उगाया जा सकेगा। इसके लिए फसलों को उसके अनुरूप तापमान मिलेगा। फायदा यह होगा कि खीरा, लौकी, गोभी समेत कई सब्जियां खाने के लिए उनके मौसम का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। इसमें लागत भी कम आएगी और सब्जियों की गुणवत्ता भी बेहतर होगी।
राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत बेमौसम हरी सब्जियां उगाने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र परिसर में पॉली हाउस का निर्माण पिछले सप्ताह शुरू हो गया। लोहे के पाइप और प्लास्टिक की जालीदार चादर से बन रहे पॉली हाउस का रकबा 560 वर्ग मीटर है। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद वैज्ञानिक तौर-तरीके से सब्जियां उगाने का काम शुरू होगा। सबसे अच्छी बात यह है कि पॉली हाउस में हर मौसम में उगने वाली सब्जियों में कीट का प्रकोप भी ज्यादा नहीं होगा। लौकी, कद्दू और खीरा उगाने के लिए फसल के अनुरूप तापमान रहेगा। ठंड के दिनों में गर्मी की सब्जियों के लिए जालीदार चादर के जरिये सूर्य की किरणों को नियंत्रित किया जाएगा, ताकि फसल की बढ़वार में दिक्कत नहीं आने पाए।
पॉली हाउस में तोरई, टमाटर, गोभी और शिमला मिर्च ही नहीं, बल्कि अन्य फसलों में भिंडी और बैंगन पर भी सामान्य के मुकाबले लागत कम आएगी। वैज्ञानिक तकनीक के तहत बेमौसमी सब्जियों पर खाद और पानी के रूप में ज्यादा खर्चा नहीं होगा। टपक विधि से सिंचाई होगी। सब्जियों पर धूल-मिट्टी का भी असर नहीं पड़ेगा तो उसकी गुणवत्ता भी बेहतर रहेगी।
कृषि वैज्ञानिक पहले चरण में खुद ही सब्जियां उगाकर इलाके के किसानों को दिखाएंगे। इसके बाद किसानों को भी नई तकनीक से बेमौसम सब्जियां उगाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। इसके बाद किसान चाहें तो खुद भी पॉली हाउस बनवाकर कम लागत में अच्छी उपज ले सकेंगे।
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बाजार में मिलेगा अच्छा मूल्य
कद्दू वर्गीय सब्जियों के उत्पादन का पीक टाइम मई-जून का महीना होता है लेकिन यही अगर दो-तीन महीने पहले बाजार में सब्जी मंडियों में उपलब्ध हो जाए तो खरीदारों का बेमौसमी सब्जियों की ओर आकर्षण बढे़गा। इसके साथ ही दाम भी अधिक मिलेगा।
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परिसर में पॉली हाउस का निर्माण आनेवाले दिनों में इलाके के किसानों के उत्थान में मील का पत्थर साबित होगा। ऐसा नहीं है कि पॉली हाउस का रकबा पांच सौ वर्ग मीटर ही रखा जाए। इसे सुविधानुसार घटाया और बढ़ाया भी जा सकता है। जैविक तौर-तरीका इसमें ज्यादा कारगर साबित होगा। बेमौसम की सब्जियां सेहत के लिए भी फायदेमंद साबित होंगी।
- डॉ. संजय कुमार, प्रभारी अधिकारी, कृषि विज्ञान केंद्र