बदायूं। बिसौली के श्री दुर्गा जनता रामलीला कमेटी के मंच पर मेघनाद-लक्ष्मण संवाद के बाद मेघनाद के वध की लीला का मंचन किया गया। मंचन के दौरान पूरे परिसर में जय श्रीराम के उद्घोष गूंज उठे। कलाकारों के उत्कृष्ट अभिनय ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
मंचन में राम की भूमिका वागीश शंखधार, लक्ष्मण की अचिन पाराशरी, मेघनाद की नन्हे और हनुमान जी की भूमिका दीपक पाराशरी ने निभाई। सभी कलाकारों ने अपने संवादों और भाव-भंगिमाओं से लीला को जीवंत बना दिया। दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकारों का उत्साह बढ़ाया। अंत में भक्ति और पराक्रम की इस लीला ने उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया।
भरत-मिलाप के भावुक कर देने वाले दृश्य ने दर्शकों का रुला दिया
उसावां। जय श्रीराम आदर्श कला मंडल ब्रजधाम मथुरा के कलाकारों ने भरत मिलाप लीला का भावविभोर करने वाला मंचन किया। मंचन में दिखाया गया कि भगवान राम के वनगमन और पिता के निधन का समाचार सुनकर भरत ननिहाल से अयोध्या लौट आए। माता कैकई के वचनों के कारण राम को वनवास की सुन व्यथित होकर भरत ने श्रीराम को वापस लाने के लिए वन को प्रस्थान किया।
अयोध्या लाने के लिए गुरु वशिष्ठ और अयोध्या वासियों के साथ चित्रकूट की ओर प्रस्थान कर दिया। वन में भरत का प्रभु श्रीराम से जब मिलन होता है, तो दर्शकों की आंखें भी छलछला उठती हैं। भरत ने श्रीराम से अयोध्या लौटकर राज सिंहासन संभालने का आग्रह किया। श्रीराम ने भरत को समझाया कि पिता के वचन को पूरा करके ही वह वन में आए हैं।
भरत का धर्म है कि वह राज्य संभालें। अंत में भरत श्रीराम की खड़ाऊ लेकर अयोध्या आ गए। राज सिंहासन पर खड़ाऊं रखकर राजकाज चलाने लगे। लीला मंचन के दौरान मेला कमेटी के अध्यक्ष श्रीकृष्ण गुप्ता, धर्मेंद्र सिंह चौहान, डीके गुप्ता, बृजेश यादव, शिवकुमार गुप्ता, अंश चौहान सहित मेला कमेटी के पदाधिकारी व सदस्य मौजूद रहे। संवाद
उसावां रामलीला में भरत और राम के मिलाप का दृश्य। संवाद