हर बार फुस्स हुआ प्रशासन की ओर से चलाया गया अभियान
मिट्टी, जल और हवा में बढ़ रहा प्रदूषण
सैकड़ों पशुओं की जा रही है जान
जीव-जंतुओं समेत पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रही पॉलिथीन का इस्तेमाल रोकने के लिए प्रशासन ने कई बार अभियान चलाया गया लेकिन कामयाबी नहीं मिली। शहर के दुकानदार धड़ल्ले से ग्राहकों को पॉलिथीन में सामान दे रहे हैं और लोग भी उसे लेने से नहीं हिचक रहे है।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी प्रशासन ने पॉलिथीन रोकने के लिए कोई गंभीर प्रयास नहीं किए। अभियान शुरू होने के बाद दो-चार दिन कुछ इलाकों में दुकानदार चोरी छुपे इसे बेचते हैं। इसके बाद खुलेआम इस्तेमाल शुरू हो जाता है। नाम न छापने की शर्त में एक दुकानदार ने बताया कि सरकारी कर्मी खुद ही कहते हैं कि कुछ दिन रहने दो, इसके बाद इस्तेमाल कर लेना। आखिर इस तरह से पॉलिथीन को रोकने का अभियान कहां से सफल हो पाएगा।
पॉलिथीन के न गलने की वजह से जहां खेतों की उर्वरा शक्ति कम हो रही हैं। पॉलीथिन जानवरों के खाने में पहुंचने की वजह से उनकी आंतों में चिपक जाती है, जिससे सैकड़ों पशुओं की मौत हो जाती है। शहर के अधिकांश इलाकों के नाले-नालियां चोक हो रहे हैं।
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पॉलिथीन जलाने से एथिलीन गैस निकलती है, जो वायु को प्रदूषित करती है। साथ ही पॉलीथिन एवं मिट्टी की उर्वरकता खत्म करने के साथ ही जानवरों को भी अपनी चपेट में ले रही है। पॉलिथीन का प्रयोग बहुत ही घातक साबित हो रहा है। इस पर नियंत्रण न हुआ, तो इसके परिणाम और भी घातक साबित होंगे।
-डॉ. राजीव राज, प्रवक्ता, रसायन विज्ञान
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पॉलीथिन पर प्रतिबंध लगाने के लिए विभागीय अधिकारियों को पहले भी निर्देश दिए गए थे। अब तक इस मामले में क्या कार्रवाई हुई। इस बारे में पूछा जाएगा। शासन द्वारा रोक लगाई गई पालीथिन का प्रयोग नहीं होने दिया जाएगा।
-एके श्रीवास्तव, सिटी मजिस्ट्रेट