चार चरणों में मतदान कराए जाने के निर्वाचन आयोग की मंशा ने जहां चुनाव में होने वालों हो-हल्ला और अप्रिय घटनाओं को कमतर कर दिया। वहीं मतगणना जैसी परीक्षा की घड़ी में यहां जिलाधिकारी ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ जो माइक्रोप्लान तैयार किया, उसके परिणाम प्रधान पद के सभी परिणाम आने से पहले दीखने लगे थे।
जिसकी गणना उसी को प्रवेश
जिलाधिकारी के प्लान में यह सबसे पहला प्रयोग था कि मतगणना में जिस वार्ड और गांव की मतगणना थी, उस समय उसी वार्ड के एजेंट और प्रत्याशी को प्रवेश की अनुमति थी। मतगणना होने पर उन्हें निकाल दूसरी मतगणना के ही एजेंट और प्रत्याशी रहने दिए गए। मतगणना स्थल पर प्रवेश पर गहन तलाशी का अभियान चला। यही नहीं काउंटिंग के लिए डबल टेबिल लगवाईं गईं। इससे मतगणना कम अवधि में, एक ही दिन में समाप्त हो गई।
माइक्रोप्लान में ये बने सहयोगी
डीएम शंभूनाथ के माइक्रोप्लान में सीडीओ प्रताप सिंह भदौरिया, एडीएम प्रशासन अशोक कुमार श्रीवास्तव, एडीएम वित्त राजेंद्र प्रसाद यादव, सहायक निर्वाचन अधिकारी प्रमेंद्र सिंह पटेल शामिल रहे।
हंगामा और विरोध प्रदर्शन में बदला कर्मियों का आक्रोश
मतगणना के माइक्रोप्लान की वजह से जहां मतगणना दो दिन में समाप्त होने की उम्मीद थी। एक ही दिन में देर रात तक खत्म हो गई। हालांकि दूसरे चरण की मतगणना को शाम सात बजे मतगणना कर्मियों की सभी जगह दूसरी टीम को बुलाकर वापस किया जाने लगा। इस पर कर्मियों ने जबर्दस्त हंगामा किया और धरना तक दिया। कर्मियों का कहना था कि उनको ड्यूटी पर बुलाया। इससे पहले प्रशिक्षण को बुलाया। मगर, उनको मानदेय से वंचित रखा गया। सहसवान और बदायूं के दो मतगणना स्थलों पर दूर-दराज से रात में पहुंचे दूसरे चक्र के मतगणना कर्मियों को निराश लौटना पड़ा। कर्मचारियों ने यहां मानदेय की मांग को लेकर जबर्दस्त हंगामा किया। धरना भी दिया और अधिकारियों से उनकी नोकझोक भी हुई। उनका कहना था कि अगर वह ड्यूटी पर नहीं आते तो उनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हो जाती और आए तो उनको मानदेय नहीं दिया गया।