जिला कारागार में महिला बंदियों ने बनाए कपडे़ के थैले। स्रोत-जेल प्रशासन
बदायूं। जेल में महिला बंदियों को भी आत्मनिर्भर बनाने का काम किया जा रहा है। जेल प्रशासन की ओर से इन महिलाओं को जरी का प्रशिक्षण दिलाया गया है। साथ ही पकड़े के थैले बनाने का काम भी सिखाया गया है। यह महिलाएं सिलाई, कढ़ाई आदि सीख कर आत्मनिर्भर बन रहीं हैं। इससे उन्हें अवसाद से मुक्ति मिल रही है।
जेल में निरुद्ध महिला बंदी अब आत्मनिर्भर की राह पर बढ़ रही हैं। जेल में बंद 40 महिलाओं को जरी और कपड़े के थैले बनाने का प्रशिक्षण दिया गया। वह थैले बना रही हैं। जिला जेल में 993 कैदी और बंदी हैं। इनमें करीब 47 महिलाएं हैं। पुरुषों को कौशल विकास मिशन के तहत इलेक्ट्रीशियन, प्लंबरिंग जैसे कार्यों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जेलर रणंजय सिंह व अधीक्षक राजेंद्र सिंह ने बताया कि महिला बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में उनको प्रशिक्षण दिलाया गया। अब वह कपड़े के थैले बना रही हैं। जेल से छूटने के बाद ये महिलाएं थैले बनाकर रोजगार शुरू कर सकती हैं।
लोक अदालत में लगी प्रदर्शनी में हुई सराहना
जेल में महिला बंदियों ने कपड़े के थैले बनाकर राष्ट्रीय लोक अदालत में प्रदर्शनी लगाई थी। इसमें बंदियों के थैलों की सराहना की गई। बंदियों का हौसला बढ़ाया गया।
कोट
- महिलाएं कपड़े के थैले बना रही हैं। इससे पहले उन्होंने जरी का काम सीखा है। इस तरह से यह महिलाएं आत्मनिर्भर बनने के साथ ही जेल में अवसाद से मुक्त होकर रह रहीं हैं। इनके उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। - रणंजय सिंह, जेलर, जिला कारागार बदायूं