बदायूं। सैजनी में एचपीसीएल के दो अफसरों की 12 मार्च को हत्या के बाद से बंद कम्प्रेस्ड बायोगैस प्लांट को शुरू कराने के लिए प्रयास तेज हो गए हैं। सोमवार को कंपनी के अफसरों ने डीएम से फोन पर वार्ता की है। मंगलवार को अधिकारियों की टीम यहां पहुंच रही है। यह टीम डीएम, एसएसपी के साथ बैठक कर प्लांट संचालन को लेकर रणनीति भी तैयार करेंगे।
प्लांट बंद होने से हर दिन करीब 13 लाख रुपये का नुकसान हो रहा है। इसलिए अब इसे शुरू कराने के लिए प्रयास तेज किए गए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से भी प्लांट का संचालन शुरू कराने के लिए सुरक्षा मुहैया कराने के निर्देश जारी हो चुके हैं। अब हत्या की घटना की विवेचना तेज होने के साथ ही लगने लगा है कि इस मामले में पुलिस का शिकंजा अभी बढ़ेगा ही। ऐसे में मुख्य आरोपी अजय प्रताप सिंह या सैजनी के किसी व्यक्ति की ओर से अड़चन नहीं आएगी।
प्लांट शुरू करने से पहले मानव संसाधन उपब्ध कराने वाली कंपनी एन-3 ई टेक्नोलॉजी लिमिटेड के प्रबंधन ने बड़ा कदम उठाते हुए 85 आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दी हैं। इनमें मुख्य आरोपी अजय प्रताप सिंह के दो भाई केशव प्रताप और चंद्रशेखर भी शामिल बताए जा रहे हैं। यानी कर्मचारियों की नए सिरे से व्यवस्था की जाएगी। कंपनी में कर्मचारियों की तैनाती के लिए नए वेंडर की भी तलाश हो रही है। कर्मचारियों के रूप में ऐसे लोगों की तलाश है जो साफ सुथरी छवि के हो और स्थानीय स्तर पर उनका किसी राजनीतिक व्यक्ति से ज्यादा जुड़ाव न हो। इसके पीछे प्लांट का सही तरीके से संचालन शुरू के रूप में देखा जा रहा है।
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एचपीसीएल के सुरक्षा सलाहकार भी आज आएंगे
सैजनी स्थित प्लांट की सुरक्षा-व्यवस्था को लेकर एचपीसीएल के सुरक्षा सलाहकार व महाराष्ट्र सरकार के पूर्व डीजीपी केपी रघुवंशी भी अन्य अधिकारियों की टीम के साथ मंगलवार को बदायूं पहुंचेंगे। यह टीम यहां डीएम व एसएसपी के साथ बैठक करने के बाद प्लांट की सुरक्षा-व्यवस्था आदि का जायजा लेंगे। इसके बाद यह प्लांट का भी भ्रमण करेंगे। इसके साथ प्लांट संचालन को लेकर भी सुरक्षा आदि का खाका तैयार किया जाएगा। प्लांट में नए सुरक्षा गार्ड से लेकर संविदा कर्मचारियों की तैनाती के लिए भी बातचीत होगी।
कंपनी से जुड़े जानकार बताते है कि सैजनी स्थित एचपीसीएल प्लांट संचालन में प्रतिदिन करीब सौ टन (एक हजार क्विंटल) पराली की जरूरत होती थी। इसका खरीद रेट 340 रुपये प्रति क्विंटल तय था जो करीब 16 एग्रीगेटर के जरिये पूरा किया जा रहा था। पराली स्थानीय स्तर पर बेहद कम मिल पा रही थी लेकिन शाहजहांपुुर, पीलीभीत आदि स्थानों से इसे खरीदकर प्लांट को उपलब्ध कराया जाता था। इस लिहाज से करीब एक करोड़ 33 लाख रुपये की पराली प्रतिमाह खरीदी जाती थी। माल की लोडिंग व अनलोडिंग का ठेका एक अलग व्यक्ति का हो गया था जिससे अजय व उसके साथियों की कम बन रही थी।
- जानकारों ने बताया कि एक क्विंटल पराली में करीब 14 किलो गैस बनती है। इस लिहाज से करीब 14 हजार किलो गैस प्रतिदिन बनाई जा रही थी। महीने के लिहाज से कमाई पर गौर करें तो करीब साढ़े तीन करोड़ से ज्यादा की गैस प्रतिमाह बेची जा रही थी। पराली से गैस मिलने के बाद करीब 70 फीसदी हिस्सा बायो वेस्ट के रूप में निकलता है जो खाद के रूप में बेचा जा रहा था। यह किसानों को केवल ढाई रुपये प्रति किलो की दर से बेची जा रही थी और इस लिहाज से करीब पचास लाख रुपये प्रतिमाह अलग कमाई हो रही थी।
- घटना के दिनों में प्लांट में एचपीसीएल के तीन अधिकारी ही थे। इनमें मारे गए दोनों अधिकारी शामिल थे, उनसे कनिष्ठ जीशान अंसारी यहां तैनात हैं। बाकी 122 कर्मचारी निजी वेंडर के जरिये रखे गए थे। इनमें अधिकांश का वेतन 12 से 15 हजार तो कुछ का 20 हजार रुपये तक था। इन्हीं में अजय व उसके परिवार और कुनबे के कई लोग शामिल थे।
प्लांट में कार्यरत आउटसोर्सिंग कर्मियों को सेवा समाप्ति की सूचना एन-3-ई टेक्नालॉजी प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंधक पराग हलानी द्वारा ई-मेल के माध्यम से दी गई। कंपनी की ओर से स्पष्ट किया गया है कि 13 मार्च से सभी संबंधित कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त मानी जाएंगी और नियमानुसार उक्त अवधि तक का भुगतान भी कर दिया गया है।
प्लांट से जुड़े लोगों ने बताया कि लगभग चार माह पूर्व ही प्लांट में मानव संसाधन उपलब्ध कराने वाली पुरानी एजेंसी लक्ष्य इंटरप्राइजेज का ठेका निरस्त कर एन-3-ई टेक्नालॉजी प्राइवेट लिमिटेड को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। नई कंपनी ने कार्यभार संभालते ही करीब 40 कर्मचारियों की छंटनी की थी, जिसमें आरोपी अजय प्रताप सिंह भी शामिल था। माना जा रहा है कि उसी समय से वह रंजिश पाले हुए था।
डीएम एचपीसीएल प्लांट संचालन के लिए कंपनी के अधिकारियों से फोन पर वार्ता हुई है। मंगलवार को कंपनी के अधिकारियों की टीम भी यहां आ रही है। प्लांट संचालन के लिए आवश्यक प्रक्रिया पूरी कराई जा रही है। अवनीश राय, डीएम