उझानी। गंगा के कछला घाट को हरिद्वार की तरह विकसित किए जाने को लेकर करीब दो साल से चल रही कवायद ने एक बार फिर तेजी पकड़ ली है। डीएम के निर्देश पर 19.45 करोड़ रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा।
सिंचाई विभाग के बाढ़ खंड डिवीजन ने दो साल पहले कछला घाट को विकसित करने के लिए 19.45 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा गया था। तकनीकी कारणों से नमामि गंगे के दफ्तर में घाट के कायाकल्प की फाइल स्वीकृति तक नहीं पहुंच पाई थी। इसलिए डीएम ने उस प्रस्ताव का पुनरीक्षण कर फिर से भेजने का निर्देश दिया है। कछला नगर पंचायत के अध्यक्ष जगदीश सिंह ने बताया कि 19.45 करोड़ रुपये के प्रस्ताव को मंजूरी दिलाने के लिए वह दो- तीन बार दिल्ली में नमामि गंगे के अफसरों से भेंट कर चुके हैं। पिछले महीने उन्होंने जलशक्ति मंत्रालय में राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के महानिदेशक राजीव कुमार मित्तल के सामने भी श्रद्धालुओं की दिक्कतों से अवगत कराया था। बताया कि पक्के घाट, पार्क और प्रकाश व्यवस्था होने से श्रद्धालुओं को राहत मिलेगी।
अप्रैल, मई, जून में सबसे ज्यादा परेशानी
- गंगाघाट पर आस्था की डुबकी लगाने के लिए राजस्थान, मध्यप्रदेश के अलावा दिल्ली समेत आसपास के जिलों से श्रद्धालु आते हैं। पूर्णिमा और विशेष स्नान पर्व पर श्रद्धालुओं की संख्या लाखों में पहुंच जाती है। घाट पर अव्यवस्थाओं की वजह से इसी महीना मथुरा में छटीकरा निवासी मयंक शर्मा, राजस्थान में धौलपुर जिले के रमेश (12) पुत्र महेश और करन (23) पुत्र दिनेश की कछला घाट पर डूबने से मौत हो चुकी है। पिछले साल अप्रैल, मई और जून में नौ श्रद्धालुओं की जान गई।