शोक व्यक्त करते अधिवक्ता अनवर आलम।संवाद
बिसौली। ईरान के शिया धर्मगुरु सैय्यद अयातुल्लाह अली खामनेई व उनके परिवार के सदस्यों की शहादत पर शिया समुदाय की महिलाओं, युवाओं और बच्चों ने इमामबाड़े में एकत्रित होकर मजलिस की और मातमपुर्सी की। इस दौरान लोगों ने शांतिपूर्वक मार्च निकालकर अमेरिका-इस्राइल विरोधी नारे लगाए।
सोमवार को शिया समाज के लोगों ने हाथों में काले झंडे और अयातुल्लाह अली खामनेई की तस्वीरें लेकर जुलूस निकाला। इस दौरान हुसैन जिंदाबाद और खामनेई जिंदाबाद के नारे लगाए गए। अंत में इमाम-ए-जुमा मशरकैन रिजवी ने ईरान और उसके नागरिकों के लिए खुदा से हिफाजत की दुआ की। मो. रजा, मुतावल्ली अब्बास रजा, अता हुसैन, साजिद अब्बास, मशहूद खां हमदम, इज्ज़त अली आदि मौजूद रहे। संवाद
पूर्व डीजीसी ने भी जताया दुख
बदायूं। ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह सैय्यद अली खामनेई की शहादत पर पूर्व डीजीसी (सिविल) और अधिवक्ता अनवर आलम ने अपने आवास मीरा जी चौकी पर शोक जताया। एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर उन्होंने इस घटना को कायराना हमला बताते हुए, इसकी कड़े शब्दों में निंदा की। अनवर आलम ने कहा कि एक मार्च को शहीद हुए आयतुल्लाह खामनेई एक निडर नेता थे, जिन्होंने साम्राज्यवादी ताकतों के खिलाफ देश की संप्रभुता के लिए अंतिम सांस तक लड़ाई लड़ी। उन्होंने भारत और ईरान के सदियों पुराने रिश्तों का जिक्र करते हुए बताया कि खामनेई महात्मा गांधी के सत्य-अहिंसा और पंडित नेहरू की गुटनिरपेक्ष नीति के प्रशंसक थे। संवाद
शोक व्यक्त करते अधिवक्ता अनवर आलम।संवाद