गांव गुधनी स्थित प्रज्ञा यज्ञ मंदिर में आर्य समाज का साप्ताहिक सत्संग का आयोजन किया गया। स्रोत
बिल्सी। गुधनी गांव में स्थित प्रज्ञा यज्ञ मंदिर में रविवार को आर्य समाज का साप्ताहिक सत्संग हुआ। इसकी शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार और यज्ञ के साथ हुई। वैदिक विदुषी आचार्य तृप्ति शास्त्री ने यज्ञ संपन्न कराया। आचार्य संजीव रूप ने वैदिक सिद्धांतों पर आधारित प्रवचन दिए।
आचार्य संजीव रूप ने कहा कि मनुष्य के जीवन का सुख-दुख ग्रहों से नहीं, बल्कि उसके कर्मों से तय होता है। उन्होंने समझाया कि यदि कोई व्यक्ति जन्म से ही समृद्ध परिवार में जन्म लेता है, उसे अच्छे संस्कार और संपत्ति प्राप्त होती है, तो यह उसके पिछले जन्म के अच्छे कर्मों का फल है। वहीं, जो व्यक्ति दरिद्रता में जीवन व्यतीत करता है, ऋण से ग्रस्त रहता है या कठिनाइयों से जूझता है, वह अपने पूर्व जन्म के बुरे कर्मों का परिणाम भोग रहा होता है। आचार्य ने कहा कि कर्म ही भाग्य का निर्माता है। तृप्ति आर्य ने कहा कि अब तो कुछ लोग राम और रावण की तुलना जाति के आधार पर करने लगे हैं, जबकि सच्चाई यह है कि राम न्याय, मर्यादा और धर्म के प्रतीक हैं। रावण अन्याय और अहंकार का प्रतीक है। इस अवसर पर मोना रानी, अगरपाल सिंह, राकेश आर्य, सत्यम आर्य, सूरज वती देवी, संतोष आदि मौजूद रहे।