म्याऊं। ग्रामीणों के बुलावे पर गोशाला में बंद साड़ों का बधियाकरण करने पहुंचे पशुपालन विभाग के दो कर्मचारियों में से एक को सांड़ ने सींगों से उठाकर पटक दिया। मौके पर बड़ी संख्या में ग्रामीण न होते तो कर्मचारी की जान भी जा सकती थी।
विकास खंड म्याऊं के गांव गूरा नवीगंज स्थित गोशाला में पशुपालन विभाग के कर्मचारी राजीव कुमार और राजेश कुमार मंगलवार को सांड़ों का बधियाकरण करने पहुंचे थे। बताया गया कि सोमवार रात ग्रामीणों ने सांड़ों को घेरकर गोशाला में बंद कर लिया था और पशुपालन विभाग को सूचना दी थी। ग्राम प्रधान समेत ग्रामीणों की सलाह पर यहां सांड़ों का बधियाकरण किया जा रहा था।
बधियाकरण के दौरान अचानक एक सांड़ ने रस्सी तोड़कर कर्मचारी राजेश कुमार पर हमला कर दिया। सांड़ ने उन्हें सींगों पर उठाकर पटक दिया। सांड़ और हमला करने पर भी उतारू था, इसी वक्त ग्रामीणों ने लाठियां भांजकर कर्मचारी राजेश को बचाने में पूरी ताकत लगा दी। अगर, ग्रामीण न होते तो उनकी जान भी जा सकती थी। हमले में राजेश गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। घायल कर्मचारी को तत्काल म्याऊं पीएचसी ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने गंभीर हालत देखते हुए बदायूं रेफर कर दिया है।
जानलेवा हो गए हैं सांड़, खौफ में ग्रामीण
क्षेत्रवासियों का कहना है कि सांड़ जानलेवा साबित हो रहे हैं। आए दिन सांड़ों के हमले हो रहे हैं। पिछले दिनों सांड़ के हमले में एक महिला की मौत भी हो चुकी है। जसमाह निवासी जयपाल पर भी मंगलवार रात खेत देखने जाते समय एक सांड़ ने हमला कर दिया था। वह किसी तरह जान बचाकर घर लौटे। घटनाओं से ग्रामीणों में दहशत है। रात के समय छुट्टा गोवंश खेतों में घुसकर फसलों को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं।
ग्रामीणों ने छुट्टा गोवंशों को जूनियर हाईस्कूल में किया बंद
वजीरगंज। गांव खुर्रमपुर भमोरी में छुट्टा गोवंशों की समस्या से परेशान ग्रामीणों का सब्र आखिरकार जवाब दे गया। बुधवार को आक्रोशित ग्रामीणों ने सभी छुट्टा गोवंशों को गांव के जनता आदर्श पूर्व माध्यमिक विद्यालय परिसर में बंद कर दिया।
ग्रामीण सत्य सिंह, राम भरोसे का कहना है कि इस समस्या को लेकर कई बार शिकायत करने के बावजूद किसी ने कोई ठोस कदम उठाया और न ही शासन-प्रशासन ने इस ओर ध्यान दिया। ग्रामीणों के अनुसार, छुट्टा गोवंश फसलों को लगातार नुकसान पहुंचा रहे हैं। इससे किसानों की मेहनत पर पानी फिर रहा है। हालात ऐसे हो गए हैं कि ग्रामीणों को पूरी-पूरी रात खेतों में जागकर फसलों की रखवाली करनी पड़ रही है। लगातार हो रही परेशानी और किसी स्तर पर सुनवाई न होने से मजबूर होकर ग्रामीणों ने यह कदम उठाया। संवाद