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शहर में कूड़ा निस्तारण योजना फ्लॉप

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फोटो-9 से 11 व 25
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कूड़ा निस्तारण योजना ने दम तोड़ा
मोहल्लों में न कूड़ा उठाने वाहन जाते हैं न सफाई कर्मचारी
डीएम ने तो लाउडस्पीकर से स्वच्छता का संदेश देने का दिया था निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। शहर में यहां-वहां फैले कचरे के प्रबंधन की योजना लगभग फ्लॉप हो चुकी है। शहर की छवि बिगाड़ने वाली इस समस्या को लेकर डीएम काफी गंभीर थे। उन्होंने ईओ को निर्देश दिए थे कि कूड़ा उठाने वाली गाड़ियों में स्वच्छता का संदेश देने वाले लाउडस्पीकर सीमित आवाज में बजाए जाएं। ताकि लोगों को वाहन की जानकारी हो सके और वे कूड़े को वाहन में डाल सकें। बावजूद यह योजना परवान चढ़ने से पहले दम तोड़ने लगी है। शहर में आज भी जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हैं।
शहर में स्वच्छता अभियान को लेकर भले ही सरकारी विभाग वाहवाही लूटने को शोर मचा रहे हों, लेकिन शहर की गलियों व चौराहों पर फैला कचरा सफाईकर्मियों की लापरवाही बयान करने के लिए काफी है। निजाम बदल गया पर उनकी बेअंदाजी कम नहीं हुई। कहीं देरी से कूड़े को उठाना तो कहीं पूरे दिन कचरा फैला रहना, सफाई अभियान को पलीता लगा रहा है। जबकि डीएम दिनेश कुमार सिंह ने पिछले दिनों सभी ईओ को आदेश दिए थे कि सभी जगह पर कूड़ा उठाने वाले वाहन बराबर चलते रहें। कहीं भी सड़कों पर गदंगी नहीं रहनी चाहिए। साथ ही कूड़ा उठाने वाली गाड़ियों पर लाउडस्पीकर लगाया जाए जो स्वच्छता के बारे में बराबर संदेश देता रहे। इससे दो फायदे होंगे। एक तो लोगों को यह पता चल जाएगा कि कूड़ा उठाने वाला वाहन आ गया है और लोग अपना कूड़ा वाहन मे डालें जिससे सड़कों पर कूड़ा कहीं फैला नहीं मिले। दूसरा यह कि स्वच्छता के संदेश जब लोगों को सुनाई देंगे तो वह खुद सफाई के प्रति चौकस रहेंगे और गंदगी नहीं करेंगे। हालांकि इस तरह की कोई कवायद आज तक नहीं की गई है।
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स्वस्थ रहने का संदेश देने वाले ही बेपरवाह
बदायूं। शरीर को स्वस्थ रखने में साफ-सफाई का अहम योगदान है। डॉक्टर भी सफाई रखकर स्वस्थ रहने की बात कहते हैं। इसके विपरीत जिला अस्पताल और जिला महिला अस्पताल खुद ही गंदगी की चपेट में हैं। अस्पताल में हर तरफ गंदगी दिखती है। यूं तो बरेली की संस्था सिनर्जी वेस्ट जिले से मेडकिल वेस्ट उठाने के लिए अधिकृत है पर अधिकतर निजी अस्पतालों में सफाई के बाद निकले कूड़ा करकट को गेट के पास में डाल दिया जाता है, जिसमें मेडिकल वेस्ट भी शामिल हैं। इस कूड़े के ढेर में आग लगा दी जाती है, जिससे कूड़ा दिनभर धीरे-धीरे जलता रहता है। कूड़े से उठने वाले धुएं से मरीज के साथ ही कॉलोनी में रहने वाले लोग भी परेशान हैं। धुएं से जहरीली गैसें निकलती हैं।
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क्या कहते हैं बाशिंदे
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फोटो-12-
जानवर फैलाते हैं सड़क पर कूड़ा उज्जवल गुप्ता का कहना है कि शहर में खुले में कूड़ा पड़ा रहता है। नेताओं की मूर्तियों के नीचे भी कचरा जमा किया जाता है। इससे आवारा जानवर वहां एकत्र हो जाते हैं और वह सड़क किनारे पड़े कूड़े को पूरे रोड पर फैला देते हैं।
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फोटो-13-
बंद कूड़ेदान लगाए जाएं
राहुल रस्तोगी का कहना है कि खुले में कूड़ा पड़ने की बजाय बंद कूड़ेदान की व्यवस्था की जाए। ताकि कूड़ा कूड़ेदान के अंदर ही रहे और सड़कों पर इधर उधर नहीं फैले और सफाई दुरुस्त रहे।
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फोटो-14-
नहीं पहुंचा सफाई कर्मचारी
असद खान का कहना है कि शहर के अधिकतर मोहल्लों के हालात बहुत खराब हैं। गालियों में महीनों से कोई भी सफाई कर्मचारी नहीं पहुुंचा है। कूड़े वाली गाड़ी पहुंचना तो अलग बात है।
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नालियां हुईं चोक
गुंजा शर्मा ने बताया कि ट्यूबवैल कॉलोनी में पिछले कई दिनों से कचरा उठने में देरी हो रही है। तीन-तीन दिन तक कचरा पड़ा रहता है। साथ ही कॉलोनी से बाहर निकलते ही कूड़े की वजह से नालियां चोक हो गईं हैं।
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वर्जन----
शहर में सफाई व्यवस्था का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। लोगों को किसी भी प्रकार की समस्या नहीं होने दी जाएगी। कूड़े उठाने वाले वाहनों पर लाउडस्पीकर लगाए जा रहे हैं। पांच-छह गाड़ियों पर यह लगाए भी जा चुके हैं।
- दीपमाला गोयल, चेयरमैन नगर पालिका बदायूं
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