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छलावा नहीं तो और क्या, कर्ज पर ब्याज बरकरार

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अमर उजाला ब्यूरो
उझानी (बदायूं)।
प्रदेश सरकार की कर्जमाफी योजना में लाभ उठाने के बाद भी लाखों की संख्या में काश्तकार अभी भी कर्जदार बने हुए हैं। सरकार ने एक लाख रुपये तक सीमा में कर्ज का मूलधन तो माफ कर दिया लेकिन उसके ऊपर चढ़े ब्याज की रकम तो काश्तकारों को खुद ही चुकानी पड़ेगी। मसलन, जिसने 50 हजार रुपये कर्ज लिया था और उसका ब्याज अब तक 40 हजार हो गया था, उसको उम्मीद थी कि एक लाख तक कर्जमाफी की घोषणा के तहत सरकार ब्याज सहित कर्ज माफ करेगी लेकिन सिर्फ मूल कर्ज 50 हजार ही माफ किया गया, ऐसे में ब्याज का कर्ज बरकरार रहा। जाहिर है कि किसान कर्ज के मामले में जहां से चला था, कर्जमाफी के बाद भी वहीं खड़ा है।
कर्जमाफी की धनराशि शासन से खाते में आने के बाद बैंक पहुंचने पर कर्जदारों को जब यह पता लगता है कि सरकार ने कर्ज ही तो माफ किया है, ब्याज नहीं तो खुद को छले हुए महसूस कर रहे काश्तकारों के सामने बैंक की देनदारी का संकट बना हुआ है। कर्जमाफी के बाद अब ब्याज के बोझ तले दबे सैकड़ों किसानों की दिक्कत अब यह भी है कि पहले बैंक का चुकता करें या फिर बेटी के हाथ पीले, यही सोच-सोच उनके चेहरों की रंगत गायब हो गई है।
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कर्जमाफ होने के बाद भी कर्जदार रह गए किसानों को लेकर प्रदेश सरकार की ओर से बैंकों में पहले ही फरमान पहुंच चुका है कि एक लाख रुपये से अधिक के कर्जदारों से बकाया रकम खातों में जमा कराई जाए। मसलन- किसी किसान क्रेडिट कार्डधारक ने 31 मार्च- 2016 से पहले एक लाख रुपया कर्ज लिया। बाद में ब्याज लगने के बाद कर्ज की रकम एक लाख 20 हजार रुपया हो गई, ऐसे में उसे एक लाख रुपये की कर्जमाफी का लाभ मिलेगा। ब्याज की रकम तो उसे चुकानी ही पड़ेगी। अगर किसी काश्तकार पर 50 हजार का कर्ज है और ब्याज मिलाकर 70 हजार बैठा तो उसे पूरा लाभ मिलेगा। कर्जदार खाताधारक को इसी दौरान फसल बीमा के रूप मिलने वाले क्लेम की धनराशि खाते में पहुंच भी जाती है तो कर्ज में उतनी रकम कम हो जाएगी।
कर्जमाफी की योजना को लेकर पसोपेश में पड़े कर्जदार किसानों के खाते में उतनी ही रकम पहुंच रही है जो एक लाख या फिर उससे कम है। ब्याज मिलाकर जिस किसी भी कर्जदार के खाते में रकम एक लाख लाख रुपये अधिक बनने पर बकाया जमा कराने के लिए बैंकों ने कवायद भी शुरू कर दी है। कर्ज माफ होने के बाद भी ब्याज के कर्जदार बने रहे काश्तकारों की अपनी समस्याएं हैं। बच्चों की पढ़ाई हो या फिर घरेलू जरुरतें, उन्हें पूरा करने के लिए भी रुपएया चाहिए। आने वाले दिन शादियों के हैं। किसी को बेटी के हाथ पीले करने है तो कोई बेटे की शादी के लिए इंतजाम करने में जुटा है। वह जब तक ब्याज का कर्ज नहीं चुकाएगा तब तक किसान क्रेडिट कार्ड का रिन्यूवल नहीं हो सकता।
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कर्ज है जो पीछा छोड़ता नहीं
फोटो- 31 बीडीएनयूजेएचपीएच-02
तिलियाखाता गांव के राकेश सर्वयूपी ग्रामीण बैंक में मिले। बोले- ब्याज मिलाकर रकम सवा लाख रुपये से अधिक हो गई। कर्जदार बना हुआ हूं लेकिन सरकार से कर्जमाफी का वास्तविक लाभ नहीं मिल पाया। माफ करना ही था तो ब्याज समेत कर्ज माफ कर देते।
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फोटो-31 बीडीएनयूजेएचपीएच-03
इलाके के गांव छतुइया के दामोदर सिंह ने एसबीआई से केसीसी बनवाया था। कर्ज की रकम पूरी माफ हो गई है या फिर ब्याज रहित, यह तो उसे नहीं पता लेकिन फील्ड ऑफीसर से बोला- मेरा तो पूरा कर्जा माफ हो गया। एनओसी दो। ताकि फिर से लोन ले सकूं।
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फोटो- 31 बीडीएनयूजेएचपीएच-04
एसबीआई के गेट पर बैठे मिले चेतूनगला गांव के वृद्घ हाकिम सिंह का कहना है कि अब सरकार ही जाने, उसने क्या किया है। बेटा आएगा, तभी पता लगेगा कि ब्याज की रकम जमा करनी पड़ेगी या फिर नहीं लेकिन ब्याज वसूल करके सरकार किसानों को फिर से संकट में डाल रही है।
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वर्जन
किसानों को संयम से काम लेना चाहिए। सरकार ने कर्ज की रकम माफ की है। ज्यादा दिन तक कर्ज नहीं चुकाने पर ब्याज तो बढ़ता ही जाएगा। ब्याज की रकम भी कर्जदार को चुकानी होगी। फिर भी अगर किसी किसान के सामने नियमों को लेकर पसोपेश है तो वह बैंक आकर समाधान करा सकता है।
- एसपी सोलंकी, प्रबंधक, सर्व यूपी ग्रामीण बैंक
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