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नियमों को ताख पर रखकर चहेतों को दे दीं स्टाफ नर्स की नौकरी

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नर्स - फोटो : डेमो
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बदायूं। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) के तहत जिले में वर्ष 2016 में हुई 85 स्टाफ नर्सों की संविदा पर नियुक्ति में नियमों की अनदेखी कर दूरदराज जिले के अभ्यर्थियों को भर्ती कर लेने का मामला शासन तक पहुंचा है। मुख्यमंत्री ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पूरे मामले की जांच कराने के डीएम को आदेश दिए हैं। डीएम ने अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) महेंद्र सिंह की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय टीम का गठन किया है और एक सप्ताह के अंदर जांच रिपोर्ट तलब की है। सो सेहत महकमे में खलबली मची है।
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देहात क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए एनआरएचएम के तहत वर्ष 16 में 85 स्टाफ नर्स की संविदा पर नियुक्ति की गई थी। बदायूं जिले के भी कई अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था मगर उन्हें नियुक्ति नहीं मिल सकी थी। तब बदायूं निवासी हिमांशु शर्मा ने शासन को शिकायत भेजी थी। जिसमें आरोप लगाया गया था कि स्टाफ नर्स की भर्ती में पूरी तरह नियमों की अनदेखी की गई है। आरोप था कि भर्ती में बदायूं और मंडल के अभ्यर्थियों को शामिल नहीं किया गया। आजमगढ़, बनारस, इलाहाबाद आदि जिलों के चहेते अभ्यर्थियों को नियुक्ति दे दी गई। स्टाफ नर्स को 18 से 20 हजार रुपये तक प्रतिमाह मानदेय दिया जाता है। इस बारे में पूछे जाने पर सीएमओ डॉ.नेमी चंद्रा ने बताया कि हिमांशु शर्मा ने शासन को शिकायत भेजी थी। इस पर मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारी बदायूं को पूरे मामले की जांच कराने के आदेश दिए।
सीएमओ ने बताया कि डीएम दिनेश कुमार सिंह ने अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) महेंद्र सिंह की अध्यक्षता में एक जांच टीम गठित की है। जिसमें वह सीएमओ और सिटी मजिस्ट्रेट को सदस्य बनाया गया है। टीम को निर्देश दिए गए हैं कि वह एक सप्ताह के अंदर पूरी जांच रिपोर्ट उन्हें उपलब्ध कराए, ताकि शासन को पूरे मामले से अवगत कराया जा सके। इधर, सूत्र बता रहे हैं कि शासन के आदेश पर हो रही जांच के बाद से सेहत महकमे के संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों में भी खलबली मची है।
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मामले से जुड़ी पत्रावलियां निकलीं
सीएमओ डॉ.नेमी चंद्रा ने बताया कि इस मामले से जुड़ी पत्रावली को निकाल लिया गया है। शिकायतकर्ता के आरोप के आधार पर टीम जांच करेंगी। जो भी सत्यता होगी उससे डीएम को अवगत कराया जाएगा।
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