बदायूं। कई वीआईपी का दौरा होने के बावजूद जिला अस्पताल में अव्यवस्थाएं हावी हैं। परेशान होकर मरीज प्राइवेट अस्पतालों की ओर रुख करने लगे है। बुधवार को रैन बसेरे में बनाए गए अस्थायी वार्ड में कई बेड खाली रहे। हालांकि इमरजेंसी में कई मरीज बेंचों पर लेटे देखे गए।
जिले में महामारी की तरह फैले बुखार की वजह से पिछले कई दिनों से जिला अस्पताल फुल चल रहा था। एक बेड पर दो-दो मरीज लेटे थे। वार्डों में पड़ी सारी बेंच फुल हैं। मरीजों की संख्या अधिक होने से वार्डों में बुरा हाल था। साफ सफाई ठीक से न होने की वजह से वार्डों में बदबू निकल रही रही है। वार्डों में एंटी लार्वा का छिड़काव नहीं किया गया, जिससे मरीजों के साथ मौजूद तीमारदार बीमार होने लगे हैं। कई वार्डों में ठीक से देखभाल नहीं हो पा रही थी। इससे कई मरीज जिला अस्पताल छोड़कर प्राइवेट में चले गए। हालांकि जिले में बुखार कम नहीं हो रहा है।
नहीं आईं बुखार की दवाएं, संकट बढ़ा
बदायूं। पिछले करीब एक सप्ताह से जिला महिला अस्पताल स्थित सरकारी स्टोर में बुखार की दवा पैरासीटामॉल, डॉक्सी साइकलिन, सिप्रो आदि नहीं है। सीएचसी और पीएचसी में पुराने स्टॉक और निजी संसाधनों से दवाएं खरीदकर काम चलाया जा रहा था। पैरासीटामॉल की 22 लाख गोली और अन्य दवाइयों का आर्डर भेजा जा चुका है। मगर बुधवार देर शाम तक दवाएं नहीं पहुंची। बदायूं दौरे पर आए डीजी ने पांच लाख गोलियां भिजवाने का भरोसा दिया था। डीजी के निर्देश के बावजूद गोलियां नहीं पहुंची।
बुखार से पीड़ित 2374 रोगियों का हुआ उपचार
बदायूं। बुधवार को दो जिला स्तरीय और 37 ब्लाक की टीमों ने बुखार के 2374 मरीजों को उपचार किया। इस दौरान 539 रोगियों का ब्लड सैंपल लिया गया। 1602 रोगियों का आरडीटी (रैपिड डायग्नोस्टिक किट) द्वारा जांच की गई। इसमें 188 पीवी और 160 पीएफ रोगी मिले।
स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने बुधवार को तीन हजार क्लोरीन गोलियों का वितरण किया। टीमों के माध्यम से बुखार के अब तक 32735 और सरकारी चिकित्सालयों में स्थापित फीवर क्लीनिक के माध्यम से 20077 बुखार के मरीजों का उपचार किया जा चुका है। मलेरिया विभाग द्वारा टीमें गठित कर किसनी, महेरा, रायपुर, ललबुजिया, हसनपुर में लार्वीसाइडल छिड़काव चार ग्रामों में फॉगिंग कराई गई।
पड़ौलिया गांव पहुंचे सीएमओ
मूसाझाग। सीएमओ डॉ. आशाराम बुधवार कऔो स्वास्थ्य टीम के साथ जगत ब्लॉक के पड़ौलिया गांव गए। जहां उनकी मौजूदगी में कैंप लगाया गया। टीम में शामिल डॉक्टरों ने मरीजों की जांच की और दवाइयों का वितरण किया।