डकैती और अपहरण के
मामले में दस साल कैद
26 साल पहले उझानी के गांव नरऊ में यशपाल के घर पड़ी थी डकैती, बेटे मुनेंद्र का कर लिया था अपहरण, एक आरोपी चल रहा है गैरहाजिर
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं।
कोतवाली उझानी क्षेत्र में 26 साल पहले पड़ी डकैती और अपहरण की वारदात में स्पेशल जज डकैती कोर्ट पंकज कुमार अग्रवाल ने एक मुजरिम को दस साल की कड़ी कैद की सजा सुनाई है। उस पर दस हजार रुपये का जुर्माना भी डाला है। एक अन्य आरोपी को बरी कर दिया गया। एक आरोपी के गैरहाजिर होने पर उसकी फाइल अलग कर दी गई है जो लंबित है।
यह घटना एक नवंबर 1991 की रात को गांव नरऊ थाना उझानी में घटी थी। गांव निवासी यशपाल सिंह पुत्र कल्यान सिंह ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि वह अपनी पत्नी मोरश्री, बेटा मुनेंद्र पाल सिंह, सुमन पत्नी मुनेंद्र और बेटी मीना के साथ घर में सो रहा था कि रात करीब एक बजे छत के रास्ते से लगभग छह सशस्त्रत्त् बदमाश घर में आ गए। हथियारों के बल पर घर में रखा सारा सामान लूट लिया। साथ ही बेटे मुनेंद्र का अपहरण कर ले गए। यशपाल ने कहा था कि उसने दो बदमाशों को पहचान भी लिया था जो गांव के ही हरिराम पुत्र गुलजारी और गप्पू पुत्र प्यारे थे। विवेचना में नरेंद्र पुत्र जयसिंह निवासी नरऊ का भी नाम प्रकाश में आया था। विवेचना हरिदत्त गौतम ने की थी।
स्पेशल जज पंकज कुमार अग्रवाल ने पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों का अवलोकन किया। अभियोजन की ओर से एडीजीसी ज्ञान स्वरूप गुप्ता और बचाव पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद मुजरिम हरिराम को दोषी करार देते हुए दस साल की कड़ी कैद की सजा सुनाई। साथ ही उस पर दस हजार का जुर्माना भी डाला। दूसरे आरोपी नरेंद्र सिंह को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया, जबकि तीसरे गप्पू के दौरान मुकदमा गैरहाजिर होने पर उसकी पत्रावली अलग कर दी गई है जो लंबित है।