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ग्लैंडर फारसी से ग्रस्त घोड़े को इंजेक्शन लगाकर मारा
हिसार की लैब में भेजे गए सैंपल से हुई बीमारी की पुष्टि
पशु चिकित्सकों की टीम को लेना पड़ा पुलिस का सहयोग
अमर उजाला ब्यूरो
उझानी (बदायूं)।
बदायूं जिले के घोड़ों को घातक बीमारी ग्लैंडर फारसी छोड़ने का नाम नहीं ले रही है। बहादुरगंज मोहल्ले के सेवाराम के घोड़े में ग्लैंडर फारसी के पुष्टि हो जाने के बाद गुरुवार को पशु चिकित्सकों की टीम नगर से सटे एक ईंट-भट्टे पर पहुंची। पशु चिकित्सकों ने सेवाराम से बात करने के बाद घोड़ा अपने कब्जे में ले लिया। उसे इंजेक्शन देकर मार दिया गया। घोड़े को मौत देते समय मौके पर आसपास के लोगों का जमघट भी लग गया।
उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. आरके गुप्ता और संस्था ब्रोक इंडिया से जुड़े विशेषज्ञ डॉ. अवधेश कुमार की अगुवाई में टीम दोपहर में ईंट-भट्टे पर पहुंची। डॉक्टरों की टीम ने ग्लैंडर फारसी से ग्रस्त घोड़ा के मालिक सेवाराम से बात करने के बाद घोड़े को कब्जे में लिया। उसे इंजेक्शन देकर मारने की कार्रवाई पूरी करने के लिए पशु चिकित्सकों की टीम ने जिस स्थान को चुना, पास में स्कूल होने की वजह से स्कूल मालिक ने विरोध कर दिया। इसके चलते पशु चिकित्सकों को स्थान परिवर्तन भी करना पड़ा। बाद में घोड़े को संजरपुर रोड स्थित खंडहर पड़े मिनी औद्योगिक आस्थान केंद्र के पास सड़क किनारे इंजेक्शन देकर मारा गया। इंजेक्शन लगाने का काम ब्रोक इंडिया के डॉ. अवधेश कुमार ने किया। इसके बाद महज पांच मिनट में घोड़े ने दमतोड़ दिया। मृत घोड़े को सड़क किनारे ही गड्डा खोदकर दफन किया गया। पशु चिकित्सकों की टीम में संजीव कुमार जौहरी, विवेक माहेश्वरी, ओमनंदन शुक्ला, शिवेंद्र चौहान और भुवनेश कुमार भी शामिल थे। उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने बताया कि पिछले महीने बदायूं में 99 घोड़ों के सैंपल जांच कराने के लिए हरियाणा में हिसार लैब को भेजे गए थे। पांच दिन पहले ही सेवाराम के घोड़े में ग्लैंडर फारसी रोग की पुष्टि हुई थी। इसके बाद तीन-चार दिन अभिलेखीय औपचारिकताएं पूरी करने में लगे। इसके लिए डीएम से भी अनुमति प्राप्त की गई थी।
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चार घोड़ों के फिर भेजे गए सैंपल
उझानी। उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. आरके गुप्ता ने बताया कि पिछले महीने ग्लैंडर फारसी की आशंका के चलते टीम ने 99 घोड़ों का सैंपल जांच के लिए हिसार की लैब भेजा गया था। इनमें 94 में बीमारी की पुष्टि नहीं हुई लेकिन चार घोड़ों की जांच रिपोर्ट को लेकर पसोपेश रहा। चारों घोड़ों का फिर से ब्लड सैंपल लेकर लैब को भेज दिया गया है। जबकि ग्लैंडर फारसी की पुष्टि होने पर बहादुरगंज मोहल्ले के सेवाराम के घोड़े का मार दिया गया है। एक साल के दौरान जिले में उझानी, कादरचौक, सहसवान समेत अन्य इलाकों में ग्लैंडर फारसी रोग से ग्रस्त 16 घोड़ों को इंजेक्शन देकर मारा जा चुका है।
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घोड़े को देख भावुक हो गए सेवाराम
उझानी। ग्लैंडर फारसी से ग्रस्त अपने घोड़े को लेकर पशुपालक सेवाराम परेशानी में दिखा। पशु चिकित्सकों की टीम ने उसे जब पूरे बात बताई तो वह भावुक हो गया। इंजेक्शन लगाए जाते समय वह भावुक हो उठा। उसकी आंखों से आंसू टपकने लगे। हालांकि सरकारी प्रावधान के तहत उसे मुआवजा के रूप में 25 हजार रुपये मिलेंगे लेकिन उसका कहना है कि दो साल पहले उसे बाजारकलां मोहल्ले के बृजपाल से घोड़ा खरीदा था। भट्टे पर काम के दौरान यही घोड़ा उसकी आजीविका का जरिया भी बना था।
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सेवाराम समेत परिजनों का होगा मेडिकल परीक्षण
उझानी। यह घोड़ा सेवाराम के पास करीब दो साल तक रहा। ब्रोक इंडिया के चिकित्सा सहायक रमेश यादव ने बताया कि पशुपालक में भी ग्लैंडर फारसी का वैक्टीरिया अटैक कर सकता है। ग्लैंडर फारसी से ग्रस्त घोड़े की लार लगने से वैक्टीरिया पशुपालक में फैल जाता है। इसी आशंका की वजह से सेवाराम और उसके परिजनों का मेडिकल परीक्षण कराया जाएगा।