रिश्तेदारों ने किया सहयोग
शकीला का साथ देने वाला भी कोई नहीं था। वह इधर-उधर रिश्तेदारियों में रहकर अपना जीवन काट रहीं थीं। भतीजे मुजीब और उसकी पत्नी ने शकीला से दोबारा निकाह करने का प्रस्ताव रखा। वह अपनी परिस्थितियों को देखते हुए इस्लाम से निकाह करने को तैयार हो गईं। सभी लोगों के सहयोग से शकीला 21 फरवरी को नैनोल बागबाला गांव आईं। वहीं दोनों का निकाह कराया गया। उम्र के इस पढ़ाव में निकाह करके दोनों खुश हैं।
इस्लाम बोले- दोनों को एक-दूसरे के सहयोग की जरूरत
इस्लाम ने कहा कि इस उम्र में बच्चों की चाहत नहीं है। बस एक-दूसरे का सहयोग बना रहे। हमें दो रोटी बनी हुई मिल जाएं और क्या चाहिए। बस इसी से जीवन गुजर जाएगा तो शकीला को एक सहारा भी मिल जाएगा। उन्होंने बताया कि शकीला के आने से उनका घर सूना नहीं रहा।