उझानी (बदायूं)। पिछले सप्ताह बूंदाबांदी और अब कोहरा पड़ने से गेहूं की फसल को संजीवनी मिल गई है। शुरुआत में मौसम गेहूं के अनुरूप तो रहा लेकिन कोहरा कम पड़ने से पौधों की बढ़वार भी प्रभावित रही लेकिन कुछेक दिन से मौसम का साथ मिला तो फसल पर हरियाली के साथ ही किसानों के चेहरे की रंगत भी लौट आई है। अगर दो-चार दिन और कोहरे के साथ नमी का माहौल बना रहा तो बाकी की कसर भी पूरी हो जाएगी। करीब डेढ़ सौ दिनों में पक कर तैयार होने वाली गेहूं की फसल के लिए कोहरे की आवश्यकता तो कल्ले निकलने के दिनों से ही शुरू हो जाती है लेकिन इस बार कोहरे ने पूरी तरह साथ नहीं दिया। तापमान भी 22 डिग्री के पार हो गया था। यही वजह रही कि गेहूं की बढ़वार उम्मीद के अनुरूप नहीं हो पाई। दो-तीन दिन से जिस तरह से कोहरा पड़ा है, उससे पौधों पर हरियाली के साथ बढ़वार भी नजर आने लगी है। किसानों में महीपाल सिंह की माने तो कोहरा लेट पड़ने से गेहूं की पिछेती फसल को ज्यादा फायदा होगा। फायदे में तो अगेती फसल भी रहेगी लेकिन उनके पौधों में कल्ले फूटने का समय निकल चुका है। पिछले दिनों हुई बारिश ने भी फसल में संजीवनी का काम किया था। बता दें कि बढ़वार और कल्ले फूटने के दिनों में गेहूं के पौधों को तापमान 15 से 20 डिग्री के आसपास चाहिए होता है। अहम बात यह भी रही कि बूंदाबांदी के दौरान गेहूं को ओलावृष्टि का भी दंश नहीं झेलना पड़ा था। पर्वतीय क्षेत्र में बर्फबारी की वजह से मैदानी इलाकों में नमी बढ़ गई है।
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पिछेती सरसों पर मांहु का खतरा बढ़ा
उझानी। कोहरा पड़ने से जहां गेहूं के अच्छे दिन आ गए हैं वहीं सरसों पर मांहु कीट का प्रकोप बढ़ने का खतरा बना हुआ है। कोहरे और नमी की वजह से ही मांहु पत्ते को चपेट में लेने लगती है। सरसों की फसल को बारिश भी नुकसान पहुंचा चुकी है। सब्जियों के राजा आलू को झुलसा रोग लग सकता है। झुलसा आलू की पत्तियों को जला देता है। इसका सीधा प्रभाव उत्पादन पर पड़ता है। --------------
वर्जन
कोहरा पड़ने से गेहूं की फसल को फायदा होगा। तापमान में गिरावट भी मुफीद साबित हो रही है। पैदावार भी अच्छी होने की उम्मीद है लेकिन सरसों पर संकट बरकरार है। मांहु ने फिर से प्रकोप दिखाया तो सरसों का उत्पादन गिरेगा।
- डॉ. संजय कुमार, कृषि वैज्ञानिक