पांच साल बाद जिले में फिर पशुओं की गणना होगी। पहले यह जिम्मेदारी राजस्व विभाग की थी, लेकिन इस बार पशुपालन और मत्स्य विभाग मिलकर गिनती करेंगे। इसमें गाय, भैंस के साथ-साथ कुत्तों की भी गिनती की जाएगी। टेबलेट के माध्यम से ये गणना की जाएगी। इसके लिए विभाग की ओर से सभी तैयारियां पूरी कर ली गईं हैं।
जिले में पशुओं की गणना करने की जिम्मेदारी पशु चिकित्सक और मत्स्य विभाग को सौंपी गई है। इस बार पशु गणना ऑनलाइन रिकॉर्ड की जाएगी। जो प्रगणक टेबलेट के जरिए पशुओं का रिकार्ड दर्ज करेंगे। इस तरह से ये गणना पूरी तरह से पेपरलैस होगी। पहले पशु गणना की जिम्मेदारी राजस्व विभाग पर होती थी, वो पशुओं का डाटा पशुपालन विभाग को मुहैया कराते थे। पूर्व में हो चुकी पशु गणना पर कई मर्तबा सवाल उठते रहे, ऐसे में पशुपालन विभाग को टीकाकरण में दिक्कतों का सामना करना पड़ता था, क्योंकि सरकार की ओर से उन्हें केवल उतनी ही वैक्सीन उपलब्ध कराई जाती थी जितना डाटा होता था। जबकि हकीकत कुछ और होती थी। इस वजह से प्रदेश सरकार ने इन समस्याओं कानिराकरण करते हुए पशु गणना की जिम्मेदारी पशुपालन विभाग को दी है। अब पशु चिकित्सक और मत्स्य विभाग इस काम को अंजाम देंगे। प्रगणक गांव, नगर पंचायत, नगर पालिका और नगर निगम में डोर टू डोर पशुओं की गणना करेंगे। मौके पर ही पशु और पशुपालक का पूरा रिकार्ड टेबलेट में दर्ज किया जाएगा।
120 गणनाकर्ता, 20 सुपरवाइजर लगाए
जिले में पशुओं की गणना करने के लिए विभाग की ओर से पशुधन प्रसार अधिकारी, पीसीडीएफ आदि को गणनाकर्ता के रूप में लगाया गया है। साथ ही उप / पशु चिकित्सा अधिकारी, मत्स्य अधिकारी आदि को सुपरवाइजर के रूप में लगाया गया हैं। इसमें 120 गणनकर्ता, 20 सुपरवाइजर और एक स्क्रूटनी आफिसर नियुक्ति किया है।
पांच साल पूर्व हुई थी गणना
जिले में छह साल बाद पशु गणना होती है। इससे पूर्व 2012 में पशु गणना की गई थी। पशुओं का रिकार्ड रजिस्टर में दर्ज किया गया था। 2013 में कुत्तों को पशु गणना में जगह नहीं दी गई थी लेकिन इस बार कुत्तों की भी गणना की जाएगी।
पांच साल बाद गणना कराई जाती है। ये बात अलग है कि विभाग पहली बार पशुओं की गणना करवाएगा। इसके लिए गणनाकर्ता और सुपरवाइजरों की टीम लगा दी है, जिन्होंने गांव में जाकर गणना का काम शुरू कर दिया है।
-डॉ. एके जादौन, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी