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डीएम के हस्तक्षेप पर जोड़ा मेडिकल कालेज का कनेक्शन

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जिलाधिकारी के हस्तक्षेप पर जोड़ा मेडिकल कॉलेज का कनेक्शन
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शहरी क्षेत्र के उपभोक्ताओं पर बाकी है 40 करोड़ का बिल
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। डीएम के हस्तक्षेप पर राजकीय मेडिकल कॉलेज का कनेक्शन जोड़ दिया गया है। 59 लाख का बकाया होने पर विद्युत विभाग ने राजकीय मेडिकल का बिजली कनेक्शन एक सप्ताह पूर्व काटा था। अंधेरे में डूबे मेडिकल कॉलेज में जैसे-तैसे जेनरेटर लगाकर काम चलाया जा रहा था। इस बारे में मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आरपी सिंह ने डीएम और बिजली विभाग के अधिकारियों के सामने वास्तविकता बताई।
उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज के पास धन आ चुका है पर इसे एक मद से दूसरे मद में ट्रांसफर करने के लिए आवश्यक अनुमति जरूरी है। यह अनुमति भी एक दो दिन में मिलने की उम्मीद है। तब डीएम के हस्तक्षेप पर मेडिकल कॉलेज की बिजली चालू करा दी गई। विद्युत विभाग को आश्वासन दिया गया कि एक सप्ताह में बकाया बिल चुका दिया जाएगा।
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मार्च तक विद्युत विभाग को 50 करोड़ रुपये शहरी और ग्रामीण क्षेत्र के उपभोक्ताओं से वसूलने हैं। विभाग अब तक बारह करोड़ वसूल कर सका है। कई सरकारी विभाग भी बिल का करोड़ों रुपया दबाए बैठे हैं। वहीं विद्युत विभाग उपभोक्ताओं से करोड़ों की रकम वसूलने के लिए कनेक्शन भी काट रहा है। कई के खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज करा चुका है। तब भी खंड प्रथम में बिजली विभाग का लगभग 40 करोड़ का बिल उपभोक्ताओं पर बाकी है। इसमें से विभाग अब तक केवल 12 करोड़ के लगभग रुपये की वसूली कर सका है। जबकि मार्च आने में दो माह ही समय बचा है। वहीं खंड द्वितीय के ग्रामीण उपभोक्ता भी बिजली वालों को बिल चुकाने के मूड में नहीं दिखाई दे रहे हैं। कई प्रयासों के बाद भी ऐसे उपभोक्ताओं ने बड़ी मुश्किल से विभाग को केवल एक करोड़ रुपया ही अदा किया है। जबकि खंड दो के उपभोक्ताओं पर विभाग का दस करोड़ रुपया वसूला जाना है।
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वर्जन
शहरी उपभोक्ताओं से लगभग 40 करोड़ की वसूली की जानी है। अब तक दस प्रतिशत के लगभग वसूली हुई है। सरकारी विभागों से अगर बकाया बिल मिल जाए तो विभाग को टारगेट पूरा करने में आसानी होगी।
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- विजेंद्र सिंह, एक्सीएन प्रथम खंड
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ग्रामीण क्षेत्र के बिजली उपभोक्ताओं पर लगभग दस करोड़ का बिजली का बिल बकाया है। केवल छह प्रतिशत ही ग्रामीण बिजली का बिल जमा करा सके हैं। जबकि विभाग लगातार बिजली दे रहा है। फिर भी उपभोक्ता बिजली का बिल चुकाने में आनाकानी कर रहे हैं।
- छैल बिहारी, एक्सीएन द्वितीय खंड
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