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युवती के अपहरण में सात साल की सजा, जुर्माना

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 सात साल पहले युवती के अपहरण के मामले में फास्ट ट्रैक प्रथम न्यायाधीश परवेंद्र कुमार शर्मा ने नामजद युवक को मुजरिम करार देते हुए सात साल की सजा सुनाई है। साथ ही पांच हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। राशि जमा होने पर आधी पीड़िता को देने का आदेश भी दिया है।
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थाना मूसाझाग इलाके के एक गांव निवासी व्यक्ति ने 29 सितंबर 2011 को रिपोर्ट लिखाई थी कि उसके यहां गांव धीमरी निवासी वीरेश पुत्र हरनाम का उसके घर आना जाना था। 24 सितंबर 2011 को वीरेश उसकी पुत्री को बुरी नीयत से बहला-फुसलाकर ले गया। उसने पुत्री को तलाश किया लेकिन उसका कोई सुराग नही मिला। उसे गांव के लोगों ने बताया कि तुम्हारी पुत्री को वीरेश के साथ जाते हुए देखा है। उसने वीरेश और उसके पिता हरनाम से कहा कि उसकी पुत्री को वापस दे दो। तब आरोपी के पिता हरनाम ने कहा तुम्हारी पुत्री को दो-चार दिन में वापस भेज देंगे जब वह दोबारा अपनी पुत्री को लेने वीरेश के यहां पहुंचा तो उन्होंने साफ मना किया कि अब तुम्हारी पुत्री को हम नहीं देंगे। तब उस व्यक्ति ने थाने पर 29 सितंबर 2011 को रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने विवेचना के बाद वीरेश पुत्र हरनाम के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की।
फास्ट ट्रैक कोर्ट न्यायाधीश परवेंद्र कुमार शर्मा ने पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों का अवलोकन किया। अभियोजन की ओर से एडीजीसी मुकेश बाबू यादव और बचाव पक्ष के अधिवक्ता की दलीलों को सुनने के बाद आरोपी वीरेश को मुजरिम करार देते हुए सात साल की कड़ी कैद की सजा सुनाई है।
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