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काल बन रहा भूसा, दो दिन में गईं तीन लोगों की जान

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बदायूं। पशुओं के चारे के लिए घरों में रखा गया भूसा अब इंसानों के जान लेने लगा है। भूसे की ढेेरी ढहने से उसमें दम घुटकर लगातार दो दिन में तीन लोगों की मौत हो चुकी है। सोमवार को मूसाझाग क्षेत्र में नादानी के चलते दो मासूमों की भूसे के ढेर में दबकर मौत हुई तो अगले दिन ही मंगलवार को बिल्सी थाना क्षेत्र के गांव अंबियापुर में भी 45 वर्षीय महावीर के लिए भूसा काल बन गया।
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असल में, भूसे को स्टोर करने के लिए कोई सुरक्षा मानक न होने से भूसा के ढेरी ढहने से मौतें हो रही हैं। पहले भी ऐसी घटनाएं होती रही हैं। किसान खेतों से भूसा उठाने के बाद उनको अपने मकानों के कमरों में भर लेते हैं। इसके बाद उसमें से धीरे-धीरे निकालकर पशुओं को खिलाते हैं, लेकिन ऐसे कोई इंतजाम नहीं किए जाते, जिससे भूसे के ढेर गिर न पाएं। आमतौर पर यह होता है कि स्टोर से भूसा भरते वक्त व्यक्ति ढेरी गिरने को लेकर सतर्क नहीं रहता। बिल्सी की घटना की यही वजह रही, लेकिन मूसाझाग थाना क्षेत्र के गांव में दो मासूमों की मौत अंजानें में हुई। खेलते-खेलते दोनों मासूम भूसे की ढेरी तक पहंच गए और हादसे का शिकार हो गए। माना जा रहा अगर भूसे के ढेरी को लेकर सुरक्षा मानक अपनाए जाएं तो शायद ऐसी घटनाओं से बचा जा सकता है।
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