जटा गांव को नाव से जाते लोग। संवाद
बदायूं। शहर के दक्षिण से होकर गुजर रही करीब 118 किलोमीटर लंबी गंगा और 60 किलोमीटर लंबी रामगंगा अफनाई तो इसकी चपेट में 40 हजार लोग आ गए। दोनों नदियों का पानी 50 गांवों में घुस गया। इसमें से 11 गांवों की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। इन गांवों के लोगों को शरणार्थी शिविरों में रखा गया है। 28 गांव ऐसे हैं, जिनकी सड़कें डूब गई हैं और घरों में पानी भर गया। इन गांवों के लोगों का आना-जाना नाव और मोटरबोट से ही हो रहा है। इसके अलावा 11 गांव पर बाढ़ का आंशिक असर है।
उसहैत क्षेत्र के जटा, प्रेमी नगला समेत चार गांव पानी से चारों ओर से घिर हैं। ऐसे ही सहसवान के गांव तोफिया नगला, वीरसहाय नगला, खागी नगला, भमरौलिया, तेली नगला और गिरधारी नगला पानी से घिरे हैं। दातागंज का नवादा बदन भी पानी से चोरों ओर से घिरा हुआ है। इसी तरह से कछला से लेकर उसावां तक 11 गांवों के रास्ते पर पानी भरा है। 28 गांवों को जाने वाली 14 सड़कें पूरी तरह से बाढ़ के पानी में डूब चुकी हैं। प्रशासन ने यहां कई नाव और मोटरबोट का इंतजाम किया है। प्रशासन लगातार इन गांवों के लोगों को शरणार्थी शिविर में पहुंचा रहा है। इस गांवों के करीब 40 हजार लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। इनकी खेती पानी में डूब गई। 10 दिनों से पानी भरा होने के कारण हजारों बीघा फसलें खराब हो गई हैं।
एसडीएम धर्मेंद्र कुमार सिंह का कहना है कि बाढ़ पीड़ित किसी भी व्यक्ति को परेशान नहीं होने दिया जा रहा है। हर संभव लोगों तक मदद पहुंचाने का काम किया जा रहा है। बताया कि नरौरा से पानी छोड़े जाने की वजह से जलस्तर बढ़ गया है। अब उम्मीद है कि धीरे-धीरे पानी कम होगा। पानी कम होने के बाद सितंबर तक लोगों की समस्याएं रहेंगी।
जटा गांव को नाव से जाते लोग। संवाद