बदायूं। महिला अस्पताल में संचालित स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) में वेंटिलेटर नहीं होने के कारण शनिवार को चार नवजातों की मौत हो गई। मृतकों में दो जुड़वां बच्चे भी थे। जिन शिशुओं की मौत हुई उन्हें समय से पूर्व जन्म (प्री मैच्योर) और कम वजन जैसी जटिलताओं के कारण वेंटिलेटर और अन्य मेडिकल सुविधाओं की आवश्यकता थी।
परिजनों ने कहा कि स्वास्थ्य व्यवस्था बदहाल होने की वजह से शिशुओं की जान चली गई। उन्होंने इलाज में कोताही बरतने का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। सुरक्षाकर्मी मौके पर पहुंच गए और परिजनों को भगा दिया। बाद में नवजात के शव परिजनों को सौंप कर उन्हें घर भेज दिया गया।
अस्पताल प्रशासन ने कहा कि ऐसे आठ से दस बच्चों को अलीगढ़ या सैफई रेफर किया जाता है। लेकिन परिजन कई बार ले जाने से इन्कार कर देते हैं, जिससे बच्चों की जान बचा पाना मुश्किल हो जाता है। महिला अस्पताल की सीएमएस डॉक्टर इंदुकांत वर्मा ने कहा कि एसएनसीयू में जिन शिशुओं की मौत हुई उनका वजन बहुत कम था। डॉक्टरों ने प्रयास किया लेकिन जान नहीं बच सकी। एसएनसीयू के डॉ. संदीप कुमार वार्ष्णेय ने कहा कि प्री मैच्योर शिशुओं के फेफड़े विकसित नहीं हो पाते। उन्हें सीपैप मशीन या वेंटिलेटर की आवश्यकता होती है। इसके अभाव में हर माह 25 से 30 नवजातों की मौत हो जाती है।
दातागंज के मोहल्ला परा निवासी धर्मपाल ने पत्नी प्रेमलता को पांच जून को महिला अस्पताल में भर्ती कराया था। उसने बालिका को जन्म दिया। उसका वजन 780 ग्राम था। उसे एसएनसीयू में भर्ती कराया गया। छह जून को डॉक्टर ने वेंटिलेटर की आवश्यकता बताकर बालिका को रेफर करने की बात परिजनों से कही, लेकिन परिजन तैयार नहीं हुए। शनिवार की सुबह नवजात की मौत हो गई।
इसी तरह दातागंज के कस्बा समरेर निवासी विपिन ने पत्नी रेनू को चार जून को महिला अस्पताल में भर्ती कराया। उसने रात में जुड़वां बच्चों को जन्म दिया। पांच जून को दोनों को एसएनसीयू में भर्ती कराया गया। दोनों का वजन कम था। वेटिंलेटर और ही सीपैप की व्यवस्था न होने के कारण शनिवार सुबह दोनों शिशुओं की मौत हो गई।
कादरचौक थाना निवासी इंत्याज ने पत्नी तरन्नुम को तीन जून को भर्ती कराया था। चार जून को उसको प्री मैच्योर बेबी पैदा हुई। पांच जून को उसे एसएनसीयू में भर्ती कराया। डॉक्टर ने रेफर कर दिया, लेकिन परिवार के लोग उसको नहीं ले गए। शनिवार को दोपहर करीब दो बजे बच्ची की मौत हो गई।
आरोप : वार्मर के लिए वसूली करते हैं कर्मी
महिला अस्पताल में 12 वार्मर हैं लेकिन यहां 17 से 18 नवजात हर समय भर्ती रहते हैं। ऐसे में नवजात को वार्मर के लिए तीन घंटे तक इंतजार करना पड़ता है। आरोप है कि कर्मचारी अवैध रूप से राशि वसूलकर वार्मर देते हैं। इस मामले में बिल्सी के रहने वाले अजित सिंह ने शिकायत की थी। सीएमएस ने कहा कि मामले की जांच जारी है।
डॉक्टर रेफर करते हैं तो परिजन कहीं ले जाने को तैयार नहीं होते। शासन से कई बार पत्राचार किया गया लेकिन वेटिंलेटर नहीं लग सके।
-डॉ. इंदुकांत वर्मा, सीएमएस, महिला अस्पताल
एसएनसीयू में चार बच्चों की मौत की शिकायत मिली है। अधिकारियों से जानकारी ली तो उन्होंने बताया कि सभी प्रीमेच्योर थे। इलाज के लिए उन्हें रेफर किया गया था, लेकिन नहीं ले गए। वेंटीलेटर की कमी के बारे में जानकारी नहीं है। इसे भी दिखवाया जाएगा।-अवनीश कुमार राय, डीएम