बदायूं। जिले में हेपेटाइटिस करीब 3500 मरीज हैं, लेकिन जांच की सुविधा नहीं है। जिला अस्पताल में हेपेटाइटिस विंग बनी है। वायरल लोड टेस्ट के लिए हर सप्ताह मंगलवार और शुक्रवार को मरीजों के नमूने लिए जाते हैं। नमूनों को जांच के लिए महीने में एक बार लखनऊ भेजा जाता है। रिपोर्ट आने में एक महीना लग जाता हैं।
हेपेटाइटिस क्लीनिक प्रभारी फिजिशियन डॉ. एसएम कमल ने बताया कि इसके प्राथमिक लक्षण नहीं हैं। केवल ब्लड टेस्ट के आधार पर ही पता किया जा सकता है कि हेपेटाइटिस है या नहीं। हेपेटाइटिस ए और ई के लक्षण 15-30 दिनों के भीतर दिखाई देने शुरू होते हैं तो बी के लक्षण अंतिम समय में सामने आते हैं। उन्होंने बताया कि हेपेटाइटिस बी, सी, डी और ई प्रकार का होता है। डी डेल्टा वायरस है, जो बी के साथ ही मिलता है। ए और ई का संक्रमण प्रदूषित खाद्य पदार्थों और दूषित पानी पीने से होता है।
मरीजों के माहवार आकंड़े
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2024 में हेपेटाइटिस बी और सी के 210 मरीज मिले थे। फरवरी में यह संख्या 230 हो गई। मार्च में 248, अप्रैल में 252, मई में 345, जून में 330, जुलाई में 355, अगस्त में 338, सितंबर में 338, अक्तूबर में 328, नवंबर में 290, दिसंबर में 326 मरीज सामने आए। जनवरी 2025 से जून तक करीब एक हजार मरीज सामने आए हैं। इसमें निजी अस्पतालों में इलाज कराने वालों का आंकड़ा शामिल नहीं है। जुलाई में अब तक 210 मरीजों के सैंपल लखनऊ भेजे जा चुके हैं। कुल मिलाकर सक्रिय मरीज 35 सौ हैं।
कोट
एक साल में 1820 मरीज स्वस्थ हुए हैं और 35 सौ से ज्यादा का इलाज चल रहा है। इसके अलावा हर महीने हेपेटाइटिस सी के करीब 250 और हेपेटाइटिस बी के 25 से 30 नए मरीज सामने आ रहे हैं। जांच बरेली में भी होती है, लेकिन शासनादेश के मुताबिक ही नमूने जांच के लिए लखनऊ भेजे जाते हैं। मेडिकल कॉलेज में जांच सुविधा होने के बाद भी नहीं कराई जा रही है। - डॉ. कप्तान सिंह, सीएमएस
इस तरह करें बचाव
सेविंग करने वाला रेजर, टूथब्रश और सुई को दूसरों को इस्तेमाल न करने दें।
हो सके तो टैटू न बनवाएं, अगर बनवाएं भी तो सुरक्षित उपकरणों का प्रयोग करें।
इस्तेमाल की हुई सिरिंज का प्रयोग न करें।