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खाद घोटाले से पहले हुईथे 968 एनपीके कट्टों की चोरी

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खाद घोटाले से पहले हुईथे 968 एनपीके कट्टों की चोरी
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बदायूं। जिले में तीन करोड़ का खाद घोटाला कोई एक दिन में नहीं हुआ था। इसके लिए बाकायदा पहले से प्लानिंग की गई थी। कहां से ट्रक आएगा और कहां भेजा जाएगा, परिवहन ठेकेदार की पूरी मिलीभगत थी।
तीन करोड़ के घोटाले की पोल खुलने से पहले पीसीएफ गोदाम में 968 कट्टे एनपीके चोरी का खुलासा हुआ था। गोदाम पर तीन चौकीदार तैनात थे। इनमें दो चौकीदार मुनीष और बदन सिंह रात में थे, जबकि नेम सिंह दिन में चौकीदारी करता था। करीब दो माह पूर्व गोदाम नंबर डी 1303 के दो गेट पर गोदरेज के ताले पड़े थे। रात के समय गोदाम में गाड़ी लगाकर एनपीके खाद के 968 कट्टे चोरी कर लिए गए और पुराने तालों के स्थान पर कंपनी के नए ताले लगाए। अंदर गेट पर लोकल कंपनी के ताले लगाए गए। चोरी का पर्दाफाश होने के बाद दोनों चौकीदारों ने गोदाम प्रभारी जगतपाल के खिलाफ तहरीर दी थी, साथ ही अपने साथ मारपीट का भी आरोप लगाया था। यह मामला डीएम दिनेश कुमार सिंह के संज्ञान में पहुंचा तो उन्होंने जांच बैठा दी। विभागीय जांच में सिर्फ 968 कट्टे खाद चोरी का ही पता नहीं चला बल्कि तीन करोड़ का घोटाला भी खुल गया। इसलिए दोनों घोटालों की अलग-अलग रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।
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किराया बचाते-बचाते शुरू हो गया घोटाला
सूत्रों की माने तो गोदाम प्रभारी जगत पाल और परिवहन ठेकेदार गोदाम आने वाली खाद को अन्य गोदामों पर सीधे पहुंचा देते थे। इससे उनका लोडिंग अनलोडिंग का किराया बचता था, लेकिन रिकॉर्ड में लेखाजोखा पूरा होता था। इसी तरह धीरे-धीरे खाद घोटाला शुरू हो गया। जांच के दौरान पता चला कि गोदाम प्रभारी के गोदाम में 442 एनपीके खाद के कट्टे अधिक पाए गए थे। बाकी डीएपी, यूरिया आदि के कट्टे गायब पाए गए। एक विवेचक ने 442 कट्टे कागजों में तो मिलान कर दिए लेकिन उन्हें हकीकत में बरामद नहीं दिखाया।
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प्राइवेट दुकानों पर बेची जा रही थी खाद
जिले के किसान खाद के लिए यूं ही परेशान नहीं थे। खाद भरपूर मात्रा में आती रही थी। खाद कहां जाती थी और कब जाती थी। इसके बारे में गोदाम प्रभारी को ही पता था। सूत्रों की माने तो गोदाम प्रभारी जगत पाल की प्राइवेट दुकानदारों से अच्छी मिलीभगत थी। कुछ दुकानों पर सरकारी खाद बेची जा रही थी।
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सहकारी समिति के सचिव भी फंसे, चार नामजद, तीन पर तैयारी
बदायूं। तीन करोड़ के खाद घोटाले में अब एक के बाद एक करके अधिकारी, कर्मचारी फंसते जा रहे हैं। इसमें सहकारी समिति के कुछ सचिव भी संलिप्त पाए गए हैं, जिनके द्वारा करीब 37 लाख से अधिक धनराशि का गबन पाया गया है। इसका खुलासा एआर कोऑपरेटिव के आदेश पर एडीसीओ और एडीओ द्वारा की गई जांच से हुआ था। पता चला कि विकास खंड इस्लामनगर के ग्राम नूरपुर पिनौनी की सहकारी समिति पर तैनात सचिव आराम सिंह द्वारा 886104 धनराशि समिति के खाते में जमा नहीं की गई। साधन सहकारी समिति नैथू पर तैनात सचिव सुरेंद्र पाल सिंह पर 765470 रुपये की खाद और बीज गबन करने का आरोप है, वहीं मलगांव पर तैनात अविनाश मिश्रा पर 765616 रुपये, वजीरगंज में तैनात अशोक पाल सिंह पर 13 लाख रुपये गबन करने के आरोप में रिपोर्ट दर्ज गई कराई है। इधर, बिनावर में तैनात अभिलाख सिंह पर 37782 रुपये, रामपाल सिंह पर 21836 रुपये, सोहनपाल पर 35331 रुपये गबन करने का आरोप है। तीनों के खिलाफ भी संबंधित थाने में तहरीर दे दी गई है।
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