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गड्ढों में तब्दील हुई डेढ़ दशक पहले बनी सड़क

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गड्ढों में तब्दील हुई डेढ़ दशक पहले बनी सड़क
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उझानी (बदायूं)। कछला से कादरचौक को जाने वाले ननाखेड़ा मार्ग पर इन दिनों पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है। करीब डेढ़ दशक पहले बनी पांच किलोमीटर लंबी सड़क पर गड्ढे तो कई साल से हैं लेकिन पिछले साल विधायक आरके शर्मा की पहल पर पीडब्ल्यूडी ने मरम्मत जरूर करा दी। मरम्मत के नाम पर गड्ढों पर पैबंद भी लगाए गए जो दो महीने में ही उखड़ गए। यही इकलौता रास्ता कटरी के गांवों को हाईवे से जोड़ता है।
कटरी के गांव ननाखेड़ा और बरेली-मथुरा हाईवे पर स्थित कछला के बीच की दूरी करीब पांच किलोमीटर है। हालांकि इसी मार्ग से होकर कादरचौक के गांवों की ओर भी आवाजाही रहती है लेकिन कछला और ननाखेड़ा के बीच गड्ढों में लुप्त होने लगी सड़क को ढूंढना मुश्किल हो गया है। ननाखेड़ा तक रास्ते में रमनगला, पलिया पुख्ता, चौसिंगा, सराय स्वाले, सरौता और खजुरारा भी हैं। जो इन गांवों के लोगों के लिए भी हाईवे तक पहुंचने के लिए इकलौता रास्ता है। सड़क की हालत को लेकर पिछले साल सरौता के प्रधान देवेंद्र सिंह ने भाजपा विधायक आरके शर्मा से संपर्क साधा तो उन्होंने हस्तक्षेप करके पीडब्ल्यूडी के जरिए मरम्मत करवा दी थी। मरम्मत के नाम पर लगाए गए पैबंद भी ज्यादा दिन तक नहीं टिक पाए। स्थिति यह है कि अगर पैदल भी निकलो तो गांवों के आसपास मेन रोड के गड्ढों में भरा नालियों का पानी अवरोधक बन जाता है। ऐसा कोई भी दिन नहीं जब ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में अनाज लाद कर मार्केट तक पहुंचने से पहले दिक्कत न होती हो।
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गंगागढ़ का संपर्क मार्ग भी बदहाल
उझानी। कटरी के गांव सरौता के यात्री शेड से होकर गांव गंगागढ़ के लिए कोलतार मिश्रित सड़क का निर्माण भी उसी दौरान तत्कालीन भाजपा विधायक प्रेमस्वरूप पाठक ने कराया था। दूरी भी करीब एक किलोमीटर है। मंडी परिषद की निधि से बने गंगागढ़ मार्ग को लेकर ग्रामीणों की मानें तो सड़क में तीन-चार फुट से अधिक गहरे गड्ढे हो गए हैं। यह बात अफसर भी जानते हैं लेकिन जीर्णोद्धार कराने की जरूरत नहीं समझते।
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