फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

‘हीरा है बेटा तो मोती हैं बेटियां’

विज्ञापन
विज्ञापन
‘हीरा है बेटा तो मोती हैं बेटियां’
विज्ञापन

उझानी (बदायूं)। अमर उजाला के अपराजिता-100 मिलियन स्माइल्स कार्यक्रम के तहत गुरुवार को बांके बिहारी कन्या महाविद्यालय उझानी में महिलाओं के व्यक्तित्व विकास पर कार्यशाला हुई। समाज में महिलाओं को बराबरी का हक कैसे मिले इस पर चर्चा की गई। वक्ताओं ने एक ऐसा माहौल बनाने पर जोर दिया गया जो आइना बनकर महिलाओं के आगे बढ़ने का रास्ता बन सके। कन्या भ्रूण हत्या को लेकर जागरूकता की कमी बताई गई तो घर-परिवार और गृहस्थी के संचालन में महिला की भूमिका को बेहतर करार दिया। लड़कियों को बेहतर शिक्षा, सुरक्षा और उन्हें सशक्त बनाने पर जोर दिया गया। एक छात्रा ने कहा बेटा हीरा है तो मोती बेटियां हैं।
मुख्य अतिथि सीओ भूषण वर्मा और ओलंपिक संघ जिलाध्यक्ष राजन मेंदीरत्ता, सामाजिक संस्था गूंज के चेयरमैन किशनचंद्र शर्मा, युवा मंच संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ध्रुवदेव ने मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने ऐसी अलौकिक रोशनी बनाए रखने पर जोर दिया जो महिला व्यक्तित्व विकास से लेकर उन्हें आत्मनिर्भर बनने के साथ बुराइयों से निपटने में मजबूती प्रदान करे। बांके बिहारी कन्या महाविद्यालय की चीफ प्रॉक्टर डॉ. रुचि गुप्ता ने महिलाओं पर होने वाले अपराधों पर चिंता जताई। कहा कि घर में बेटे की तरह बेटियों को देखा और समझा जाए तो कोई दिक्कत नहीं आ सकती। समाज में उन लोगों को अपनी सोच बदलनी होगी जो बेटियों को बोझ समझते हैं। डॉ. शरद अरोरा ने कहा कि सामाजिक ताने-बाने को मजबूती बेटियों के योगदान के बगैर नहीं मिल सकती। वक्ता छात्राओं में लक्ष्मी ने कन्या भ्रूण हत्या पर गुस्से का इजहार किया। सवाल किया कि जब कन्या ही नहीं होगी तो समाज को आइना कौन दिखाएगा? छात्रा मायूनर और रुपल माहेश्वरी ने कहा कि आत्मरक्षा की दिशा में कदम उठाने से ही उन भेड़ियों को सबक मिलेगा जो आधी आबादी को ओछी नजर से देखने की कोशिश करते हैं।
विज्ञापन

कॉलेज के डायरेक्टर डॉ. वीके शर्मा, सह प्रबंधक कपिल गोयल उर्फ सोनू, युवा मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष ध्रुवदेव गुप्ता और प्रभारी निरीक्षक विनोद कुमार चाहर ने भी बेटियों को आत्मनिर्भर बनाकर उन्हें बराबरी का दर्जा देने की सलाह दी। सीओ भूषण वर्मा ने कहा कि शिक्षा ग्रहण करना सबका अधिकार है, लेकिन अनुभव भी होना चाहिए। बेटियों के अंदर एक बात जरूर होनी चाहिए कि सामने वाला उन्हें किस नजर से देख रहा है। जमाना इंटरनेट का है, सो तमाम तरह से उन्हें गुमराह करने की कोशिश की जा सकती है। अगर पहले से अनुभव के आधार पर अनुमान लगा लिया जाए तो कोई कुछ गलत सोचने की हिम्मत भी नहीं जुटा सकता। बेटियां और महिलाएं अपने बल पर समाज को नई दिशा दिखा सकती है। मातृशक्ति ने कई ऐसे आयाम स्थापित किए हें जो समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बने हुए हैं। बांके बिहारी कन्या महाविद्यालय के साथ परिसर में ही संचालित साईंनाथ कॉलेज और बांके बिहारी लॉ कॉलेज की छात्राओं ने भी हिस्सा लेकर अपना पक्ष रखा। शिक्षिकाओं में डॉ. सरला शर्मा, डॉ. शाहीन रिजवी, सारिका रानी, नवीन कुमार, अवनीश गुप्ता और भारती जैन ने महिला व्यक्तित्व विकास पर जोर दिया।
---------

महिलाओं को मिले पूर्ण अधिकार
मौजूदा समाज में महिलाओं की स्थिति चिंतनीय है। समाज में महिलाओं को बराबर का अधिकार खुद हासिल करना होगा। मांगने से कुछ ज्यादा नहीं मिल पाता।
- अरीबा खानम, छात्रा
--------

सोच में बदलाव की आवश्यकता
जो लोग बेटियों को बोझ समझते हैं उन्हें अपनी सोच में बदलाव लाना होगा। कन्या भ्रूण हत्या से जो माहौल बना है, उसे भी बदलना होगा। यही समाज है जो बेटी के तरक्की करने पर उसकी तारीफ भी करता है।
-निकिता राठौर, छात्रा
----------

कोमलता ही महिलाओं की मजबूती है
लोग महिलाओ को कोमल और कमजोर समझते हैं। महिलाओं की कोमलता ही उनकी मजबूती है। महिलाओं को दो दिया जाए, वे उसका कई गुना बढ़ाकर लौटाती हैं। किसी भी मामले में महिलाएं पुरुषों से ज्यादा सक्षम हैं।
विज्ञापन

-रुपम गंगवार, शिक्षिका
-----------

बेटे की चाहत में मिटा देते है बेटियां
कुछ पढ़े लिखे लोग भी बेटों की चाहत में बेटियों को जन्म लेने से पहले ही मिटा देते हैं। इसके लिए भ्रूण हत्या कराई जाती है। जबकि बेटों से ज्यादा बेटियां माता-पिता का ख्याल रखती हैं।
- मोनिका, छात्रा
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें