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सावधान! बदलता मौसम कहीं आपको कर न दे बीमार

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सावधान! बदलता मौसम कहीं आपको कर न दे बीमार
ठंड के साथ अस्पतालों में बढ़ी मरीजों की संख्या
सांस, दमा, ब्लड प्रेशर, हार्टअटैक के मरीजों को सबसे ज्यादा खतरा
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। बदलते इस मौसम में तापमान तेजी से ऊपर-नीचे होता है। इससे दिन में गर्मी और रात को ठंड होती है। दिन की गर्मी देखकर लोग रात की सर्दी के प्रति लापरवाह रहते हैं। यही लापरवाही बीमारी का कारण बन जाती है। मौसम बदलने के साथ जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। सबसे ज्यादा सर्दी, जुकाम, बुखार और हृदय रोगी अस्पताल पहुंच रहे हैं। बदलता मौसम श्वांस, दमा, ब्लड प्रेशर, हार्टअटैक के मरीजों के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक होता है।
मौसम बदलने के साथ जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। धीरे-धीरे ऐसे मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है, जो मौसमी बीमारियों से पीड़ित हो रहे हैं। सर्दी जुकाम के अलावा खांसी से पीड़ित मरीजों की संख्या सबसे अधिक है। इसमें सर्दी जुकाम के 40 प्रतिशत मरीज आ रहे हैं तो वहीं खांसी से पीड़ित 60 प्रतिशत मरीज हैं। इसके अलावा बदन दर्द, जोड़ों का दर्द और सांस फूलने से परेशान मरीज भी आ रहे हैं। जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या पर गौर करें तो कम से कम एक हजार लोगों के पर्चे बन रहे हैं। इनमें पांच सौ से लेकर छह सौ मरीज सर्दी जुकाम के ही निकल रहे हैं।
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इधर, अस्थमा, दमा, ब्लड प्रेशर, हार्टअटैक, स्ट्रोक, सांस फूलने और सीने में दर्द के मरीजों की संख्या भी कम नहीं हो रही है। सिर्फ हृदय रोगियों की बात करें अगस्त माह में 315 मरीज आए थे। सितंबर में 358, अक्तूबर में 455 मरीजों ने पर्चा बनवाकर दवा ली। वहीं नवंबर माह के शुरू होने से अब तक 177 हृदय रोगी अस्पताल में दवा ले चुके हैं। यानि ठंड बढ़ने के साथ हृदय रोगियों की संख्या बढ़ने लगी है। एक दिन में 40 से 60 मरीज हृदय रोग से संबंधित पहुंच रहे हैं। ऐसे में हृदय रोगियों को सबसे अधिक खतरा है।
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एक दिन में 15 लोगों को हार्टअटैक
-सोमवार को जिला अस्पताल में 15 ऐसे लोग पहुंचे थे, जिन्हें हार्टअटैक पड़ा था। सभी का ईसीजी कराया गया और जिला अस्पताल में ही कंट्रोल कर लिया गया। इस दौरान उन्हें सलाह दी गई कि वह ज्यादा भागदौड़ नहीं करेंगे और सीड़ियां नहीं चढ़ेगें और न ही दौड़ लगाएंगे। ठंड में जितना बचाव कर सकेंगे, उतना ही उन्हें लाभदायक होगा।
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यह न खाएं हार्टअटैक के पेसेंट
-चिकित्सक के मुताबिक हार्टअटैक के मरीज को जहां ठंड से बचाव की जरूरत है। वहीं चिकनाई युक्त भोजन मना कर दिया जाता है। नमक की मात्रा बहुत कम कर दी जाती है। मछली, मांस, मदिरा, बीड़ी, सिगरेट और तंबाकू पर पूर्णतया रोक लगा दें। यह मरीज के लिए लाभदायक सिद्घ होगा। इसके सेवन से मरीज की हालत और बिगड़ सकती है।
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मंगल, गुरुवार को मेडिकल कॉलेज पहुंचें हृदय रोगी
-अब राजकीय मेडिकल कॉलेज में भी हृदय रोगियों का उपचार शुरू कर दिया गया है। मेडिकल कॉलेज में ईको जांच की सुविधा है। जिला अस्पताल में बैठने वाले डॉ. गीतेश गोविल ही दोनों दिन मेडिकल कॉलेज में मरीजों का उपचार करेंगे। बाकी दिन डॉक्टर जिला अस्पताल में मरीजों को देखेंगे।
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मौसमी बीमारियों से बचाव
-सुबह शाम की ठंड से बचे
-गर्म कपड़े पहनें
-गर्म पानी पिएं और गर्म भोजन खाएं
-ठंडी चीजों का इस्तेमाल का न करें
-सर्दी-जुकाम होने पर भी डॉक्टर की सलाह लें
-पेट में गैस की शिकायत पर तुरंत दवा लें
-मुंह पर मास्क या कपड़ा रख कर निकलें
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ठंड में हार्टअटैक का खतरा अधिक रहता है। सीने में दर्द वाले मरीज तो प्रतिदिन आ रहे हैं। कम से कम 10-12 मरीज हार्टअटैक के ही आ रहे हैं। ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ ही रही है। तो उन्हें ठंड से बचाव की जरूरत है। सीने में जरा सा भी दर्द हो तो तुरंत जिला अस्पताल पहुंचें और दवा लें।
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- डॉ. गीतेश गोविल, कार्डियोलॉजिस्ट जिला अस्पताल
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मौसम बदलने के बाद सर्दी जुकाम और खांसी के मरीज बहुत आ रहे हैं। हम रोजाना तीन से पांच सौ मरीजों को देख रहे हैं। मौसम के हिसाब से लोगों को गर्म कपड़े पहनने की जरूरत है। गर्म पानी लेते हैं। सुबह शाम गर्म कपड़े ही पहनकर निकलें, तो सर्दी के साथ बीमारियों से बचा जा सकता है।
डॉ. स्वतंत्र पाल सिंह, फिजीशियन जिला अस्पताल
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