कादरचौक (बदायूं)। कितनी मेहनत और आर्थिक दिक्कतों को उठाकर किसानों ने शकरकंद, गन्ना और धान की फसल लगाई थी, मगर उन्हें यह फसलें मेला ककोड़ा की वजह से समय से पहले ही काटनी पड़ रहीं हैं। खास बात तो यह यह कि प्रभावित किसानों को शासन-प्रशासन की ओर से एक पाई का मुआवजा भी नहीं दिया जाता है। वजह है कि मेला मुगल शासन से लग रहा है। किसानों को जमीन बाद में आवंटित की गई है।
वैसे तो किसानों पर हर साल किसी न किसी तरह की दैवीय आपदा आती रही है। मगर यह किसान ऐसे हैं जो किसी आपदा के डर से नहीं बल्कि रुहेलखंड के मिनी अर्द्धकुंभ के नाम से लगने वाले मेला ककोड़ा मेले के कारण ही अपनी फसलों को समय से पहले ही काट रहे हैं। गांव नियाजी नगला निवासी हाकिम अली का दस बीघा खेत में गन्ने की फसल खड़ी है। इसी गांव के इकरार की 12 बीघा खेत में शकरकंद की फसल है। इसी तरह गांव तिलकनगला, कादरगंज खाम के दर्जनों किसानों की शकरकंद, गन्ना और धान की फसल खेतों में खड़ी है। 25 अक्टूबर से मेला शुरू हो रहा है सो सभी किसान समय से पहले ही अपनी फसलों को काटने में लगे हैं।
किसानों ने कहा कि अगर उन्हें यह पता हो कि मेला का स्थल एक की जगह रहे तो उनके सामने ऐसी समस्या नहीं आए। बोले-गंगा की धारा परिवर्तन के कारण मेले का स्थल बदलता रहता है। किसानों ने कहा कि भविष्य में वह ऐसी फसल बाजरा, तिल आदि करेंगे जो मेला शुरू होने से पहले ही कट जाती हैं। तब उन्हें दिक्कतें नहीं होंगी। किसानों ने कहा कि उन्हें कभी फसल का मुआवजा नहीं मिलता है। उसकी वजह है कि उनके पट्टे मेले के बाद हुए हैं। मेला तो मुगल शासनकाल से चल रहा है।
राज्यपाल का यह आदेश
कादरचौक। तत्कालीन राज्यपाल के सामने एक समस्या यह आई थी कि पड़ोसी जिला कासगंज ने अपनी जमीन मेले को देने से इंकार किया था। तब बदायूं जिला पंचायत ने मामले को राज्यपाल तक पहुंचाते हुए पूरी स्थिति से अवगत कराया था। बाद में राज्यपाल ने आदेश किया था कि जौरीनगला से आठ किमी अर्द्ध व्यास गंगा की ओर जहां पर गंगा की धार स्नान के अनुकूल होगी वहीं पर मेला लगेगा। फिर चाहें किसी भी जिले की जमीन क्यों न हो। इसके बाद समस्या का निदान हुआ।
कच्चे मार्ग पर फंसे टैंट का सामान ले जाने वाले तीन ट्रक
कादरचौक (बदायूं)। तंबुओं का शहर बसने को तैयार है। मगर मेला स्थल पर जो रास्ते बनाए गए हैं वे अच्छे नहीं बने हैं। लिहाजा मध्य प्रदेश के भिंड जिले के टैंट का सामान लेकर आए तीन ट्रक उन्हीं कच्चे रास्तों में फंस गए। मेला प्रशासन ने उन ट्रकों को बाहर निकलवाने को जेसीबी लगाई मगर वह बुरी तरह से रेत में फंस जाने के कारण बाहर नहीं निकल पाए। लिहाजा, बीच रास्ते में ही उनका सामान उतरवाकर डनलप से भेजा गया है।
जिला पंचायत मेले की जिम्मेदारी संभालता है। सो हर साल मेला स्थल में श्रद्धालुओं में वाहनों की सुविधा को कच्चे रास्ते बनाए जाते हैं। इस बार जो रास्ते बनाए गए हैं वह ज्यादा कारगर नहीं हैं। देखा जा रहा कि पतेल के बीड़ा रस्सी से बांधकर उन्हें रेत में दबाया जाता है। बाद में उसके ऊपर पानी का छिड़काव किया जाता है ताकि रेत न उठे। मगर अभी तक उन रास्तों पर पानी का छिड़काव नहीं कराया गया है, जिससे रास्ते लवालव हो गए हैं।
आज मध्य प्रदेश के भिंड जिले से टैंट का सामान लेकर तीन ट्रैक यहां पहुंचे। जो बीच मेें ही रास्ते में फंस गए। जिला पंचायत प्रशासन ने इन ट्रकों को बाहर निकालने को पहले ट्रैक्टर लगाया। बाद में जेसीबी और ट्रैक्टर दोनों को लगाया मगर रेत में फंसे यह ट्रक टस से मस नहीं हुए। लिहाजा,वहीं से सामान को उतरवाकर संबंधित स्थान पर भेजा।
...कहीं दलदल न बन जाए मुसीबत
कादरचौक। मेला स्थल से मुख्य मार्ग से करीब तीन सौ मीटर दूर एक नाला बह रहा है। उसे मिट्टी डालकर पाटा गया है। उसके दोनों ओर पानी भरा हुआ है। लोगों का कहना है कि जमीन से कुछ फिट के नीचे ही पानी है। ऐसे में वाहनों के दबाव से वो नाला दबदल का रूप ले सकता है। इस बारे में जब जिला पंचायत अवर अभियंता लालता प्रसाद से बात की गई तो बताया गया कि नाले पर रेत और बीड़ा की परत को ज्यादा डाला जाएगा जिससे किसी तरह की दिक्कत खड़ी नहीं होगी। बोले-फिर भी यहां पर ज्यादा निगरानी रखी जाएगी।
गंगा का जलस्तर बढ़ा, मेले तक गंगा बदल सकती है अपना रुख